सिकन्दरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)l
अद्वैत शिवशक्ति परमधाम परिसर, इहा बिहरा में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 15 फरवरी को भव्य शिवाचरण एवं विविध धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। आयोजन समिति द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या पर विधिवत पूजन के उपरांत अखण्ड अष्टयाम संकीर्तन का शुभारम्भ होगा। इसके साथ ही रात्रि भर शिव नाम संकीर्तन, अभिषेक, आरती, स्तुति, हवन-पूर्णाहुति तथा अगले दिन विशाल भंडारे का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।परमधाम परिसर आध्यात्मिक साधना और शिवभक्ति का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां श्रद्धालुओं को उस ‘अमर कथा’ के श्रवण का अवसर मिलता है, जिसे श्रद्धा स्वरूपा जगदम्बा पार्वती और विश्वास स्वरूप जगत्पिता शंकर के मध्य संवाद के रूप में वर्णित किया गया है। आयोजन से जुड़े संतों का कहना है कि शंकर और शिव के स्वरूप में सूक्ष्म आध्यात्मिक अंतर है—जहां शंकर आराधक के रूप में पूजित हैं, वहीं शिव सर्वाराध्य, समस्त सृष्टि के कल्याणकारी तत्व के रूप में प्रतिष्ठित हैं।उल्लेखनीय है कि गत वर्ष परमधाम के प्रतिष्ठापक परम पूज्य स्वामी ईश्वरदास ब्रह्मचारी मौनी बाबा जी महाराज ब्रह्मलीन हो गए थे। उनके ब्रह्मलीन होने से शिष्यवृंद एवं श्रद्धालु अत्यंत मर्माहत हैं। हालांकि, उनके अनुयायियों का मानना है कि गुरुवर की अदृश्य कृपा और प्रेरणा आज भी परिसर और भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान कर रही है। उनके बताए मार्ग पर चलकर शिष्यगण इस आयोजन को श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न कराने में जुटे हैं।धार्मिक मान्यता के अनुसार महादेव ने अपने सद्गुरु से जो ज्ञान प्राप्त किया, वही दिव्य कथा उन्होंने माता पार्वती को सुनाई। गुरु-शिष्य परंपरा की इसी अविच्छिन्न धारा के माध्यम से आज भी श्रद्धालु उस दुर्लभ ज्ञान का श्रवण-मनन कर रहे हैं। संत परंपरा में गुरु की महिमा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। मदालसा की कथा इसका उदाहरण है, जिन्होंने अपने पुत्रों को ज्ञानमार्ग का उपदेश देकर भवबंधन से मुक्त किया था।संतों का कहना है कि गुरु की कृपा के बिना आध्यात्मिक उन्नति संभव नहीं है। जो व्यक्ति गुरु से छल या प्रपंच करता है, उसका जीवन अंधकारमय हो जाता है। कबीरदास का यह प्रसिद्ध दोहा आज भी मार्गदर्शक है—
“यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान।
शीश दिये जो गुरु मिले, तो भी सस्ता जान॥”महाशिवरात्रि के इस आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
