नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारतीय वायु सेना के हल्के लड़ाकू विमान, तेजस एमके 1, को उस समय बड़ा झटका लगा जब यह दुबई एयर शो 2025 में एक हवाई प्रदर्शन के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में विमान के पायलट शहीद हो गए हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित यह विमान दो दशकों से अधिक समय से भारतीय बेड़े का हिस्सा है। हालांकि, 24 साल के सेवाकाल में यह तेजस की दूसरी बड़ी दुर्घटना है।
24 साल में दूसरी दुर्घटना: पहली बार कब हुआ था हादसा?
तेजस विमान के साथ पहली बड़ी दुर्घटना 12 मार्च 2024 को हुई थी।
- पहला हादसा (12 मार्च 2024): यह दुर्घटना राजस्थान के जैसलमेर के पास, तीनों सेनाओं के एक संयुक्त अभ्यास के दौरान हुई थी।
- कारण (शुरुआती रिपोर्ट): शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, जैसलमेर दुर्घटना का कारण इंजन में समस्या (संभवतः तेल पंप की खराबी के कारण इंजन बंद होना) बताया गया था।
- पायलट की स्थिति: उस घटना में पायलट सुरक्षित रूप से बाहर निकलने (Eject) में सफल रहे थे।
दुबई एयर शो क्रैश (2025): दुर्घटना का कारण क्या?
दुबई एयर शो में हुई यह दुर्घटना दर्शकों के सामने प्रदर्शन के दौरान हुई।
- दुर्घटना का संकेत: चश्मदीदों के अनुसार, विमान ने नियंत्रण खोने से कुछ देर पहले एक नेगेटिव-जी पैंतरेबाजी (Negative-G Manoeuvre) की थी। इस पैंतरेबाज़ी के तुरंत बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और दुर्भाग्य से इसमें पायलट की जान चली गई।
- जांच के आदेश: भारतीय वायुसेना ने इस हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का ऐलान किया है।
कोर्ट ऑफ इंक्वायरी में क्या होगा?
जांचकर्ता दुर्घटना के पीछे के सही कारणों को स्थापित करने के लिए कई पहलुओं पर गौर करेंगे:
- फ्लाइट-डेटा रिकॉर्डर (ब्लैक बॉक्स) की जानकारी।
- युद्धाभ्यास मापदंडों (विशेष रूप से नेगेटिव-जी टर्न) का विश्लेषण।
- इंजन के प्रदर्शन लॉग (Engine Performance Logs)।
- प्रदर्शन उड़ान की स्थितियों के मानवीय पहलू (Human Factors)।
इस जांच के नतीजे भविष्य के प्रदर्शन-उड़ान प्रोटोकॉल, प्रदर्शन पायलटों के प्रशिक्षण और पूरे तेजस बेड़े के लिए परिचालन सुरक्षा प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं।
तेजस का महत्त्व: स्वदेशी निर्माण और निर्यात का लक्ष्य
तेजस एक सिंगल इंजन वाला, डेल्टा-विंग हल्का लड़ाकू विमान है, जिसे भारत के पुराने लड़ाकू विमानों की जगह लेने और विदेशी निर्यात (Export) के लिए डिज़ाइन किया गया है। दो दशकों से अधिक के विकास और सेवाकाल में, केवल दो दुर्घटनाओं के साथ, इस कार्यक्रम ने एक मजबूत सुरक्षा रिकॉर्ड पर ज़ोर दिया है। यह दुर्घटना भारत के रक्षा निर्माण को स्वदेशी बनाने के व्यापक प्रयास के बीच हुई है, जिससे सार्वजनिक जांच बढ़ गई है।
