कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में वाणिज्यिक एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) के आवंटन को लेकर प्रशासन ने नई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर के निर्देशानुसार यह निर्णय राज्य और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में लागू किया गया है।
नई व्यवस्था विशेष सचिव, उत्तर प्रदेश शासन के 24 मार्च 2026 के पत्र तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा जारी निर्देशों के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य एलपीजी की उपलब्धता को संतुलित बनाए रखना और जरूरतमंद क्षेत्रों को प्राथमिकता देना है।
निर्देशों के अनुसार, वर्तमान स्थिति को देखते हुए वाणिज्यिक एलपीजी का आवंटन पूर्व की तुलना में 50 प्रतिशत तक सीमित किया गया है। प्रशासन का मानना है कि इससे संभावित कमी की स्थिति में आवश्यक सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा।
नई गाइडलाइन के तहत रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल, गेस्ट हाउस, औद्योगिक कैंटीन, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, डेयरी उद्योग, सरकारी व स्थानीय निकायों की रियायती कैंटीन, सामुदायिक रसोई और प्रवासी श्रमिकों के लिए एफटीएल श्रेणी को प्राथमिकता दी गई है, ताकि आम जनता को भोजन और जरूरी सेवाओं में कोई बाधा न आए।
प्रशासन ने सभी वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) में पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। इसके माध्यम से उपभोक्ताओं का डेटा व्यवस्थित रूप से दर्ज होगा और एलपीजी वितरण में पारदर्शिता बनी रहेगी। साथ ही, उपभोग का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे भविष्य में वास्तविक जरूरत के अनुसार आवंटन तय किया जा सके।
इसके अतिरिक्त, सभी उपभोक्ताओं को सिटी गैस वितरण इकाइयों के साथ पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन के लिए आवेदन करना भी अनिवार्य किया गया है। यह कदम एलपीजी पर निर्भरता कम करने और दीर्घकालिक गैस आपूर्ति को स्थिर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जिलाधिकारी ने विक्रय अधिकारियों को वर्ष 2025 तथा जनवरी-फरवरी 2026 के दौरान वितरित एलपीजी सिलेंडरों का विवरण तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि आगे की कार्यवाही केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तय की जा सके।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी। यह निर्णय जनहित में लिया गया है, जिससे आवश्यक सेवाएं निर्बाध रूप से संचालित होती रहें।
