भूकंप आने से पहले मिलेगा अलर्ट! ISRO-NASA का निसार सैटेलाइट 30 जुलाई को होगा लॉन्च

अब हर तबाही पर होगी नज़र, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन में आएगी क्रांति

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA मिलकर 30 जुलाई को एक ऐतिहासिक सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहे हैं। इस संयुक्त मिशन का नाम है ‘निसार’ (NISAR – NASA ISRO Synthetic Aperture Radar)। यह दुनिया का पहला ऐसा सैटेलाइट होगा जो धरती की सतह पर हो रहे बदलावों पर बारीकी से नज़र रखेगा और भूकंप, दरारें, भूस्खलन और अन्य आपदाओं की पहले से जानकारी देने में सक्षम होगा।

क्या है निसार मिशन? निसार एक अत्याधुनिक सैटेलाइट है जिसे NASA और ISRO ने मिलकर विकसित किया है। इसमें दो तरह के रडार लगे हैं – L-बैंड रडार (NASA) और S-बैंड रडार (ISRO)। ये रडार पृथ्वी की सतह पर होने वाले सूक्ष्म बदलावों को भी पकड़ने में सक्षम हैं। इससे वैज्ञानिकों को यह अनुमान लगाने में मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में भूकंप या अन्य भू-आपदा की संभावना बन रही है।

कहां से और कैसे होगा लॉन्च? यह सैटेलाइट 30 जुलाई को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV रॉकेट के माध्यम से लॉन्च किया जाएगा। निसार को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थापित किया जाएगा, जिससे यह हर 12 दिन में पूरी पृथ्वी की स्कैनिंग करेगा।

निसार से क्या-क्या फायदे होंगे? भूकंप और दरारों की पूर्व चेतावनी: सतह की हरकतों को ट्रैक कर संभावित भूकंपों का अंदेशा पहले ही लग सकेगा।बाढ़, सूखा और भूस्खलन का आकलन: इससे पर्यावरणीय आपदाओं पर तुरंत निगरानी संभव होगी।जलवायु परिवर्तन पर नज़र: जंगलों की कटाई, ग्लेशियरों का पिघलना और समुद्री स्तर में बढ़ोतरी जैसे परिवर्तन को ट्रैक किया जा सकेगा।

कृषि क्षेत्र को मिलेगा लाभ: खेती योग्य भूमि की स्थिति और नमी की मात्रा का सही आंकलन कर किसान बेहतर फैसले ले सकेंगे।

क्यों है यह मिशन खास? निसार मिशन ना केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकता है। यह सैटेलाइट 3 से 5 वर्षों तक लगातार डेटा भेजेगा जो आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, नगरीय योजना और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगा।

वैज्ञानिकों की उम्मीद – ISRO और NASA के वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह मिशन मानव जीवन की सुरक्षा और प्रकृति के बेहतर प्रबंधन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इस मिशन के जरिए दुनिया भर की सरकारें प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ पहले से तैयार रह सकेंगी।

Editor CP pandey

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