आपदा से बचाव के लिए सतर्कता और पूर्व तैयारी जरूरी

दिग्विजय नाथ पीजी कॉलेज में विशेष व्याख्यान, जोखिम कम करने में जनभागीदारी पर जोर

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दिग्विजय नाथ पीजी कॉलेज के भूगोल विभाग की ओर से अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसमें आपदाओं से होने वाली जन-धन की क्षति कम करने, पूर्व चेतावनी प्रणाली को प्रभावी बनाने, जनजागरूकता बढ़ाने और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल भास्कर ने कहा कि बाढ़, भूकंप, सूखा, चक्रवात और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएं जनजीवन के साथ विकास कार्यों को भी व्यापक रूप से प्रभावित करती हैं। इनके दुष्प्रभावों को कम करने के लिए आपदा जोखिम की पहचान, वैज्ञानिक योजना, समय पर पूर्व चेतावनी और जनभागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आपदा से पहले की गई तैयारी जन-धन की क्षति को काफी हद तक कम कर सकती है।
सहायक आचार्य डॉ. जितेंद्र पांडेय ने अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1989 में आपदा न्यूनीकरण के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने की पहल की थी। प्रत्येक वर्ष 13 अक्टूबर को मनाए जाने वाले इस दिवस का उद्देश्य आपदा जोखिम कम करने और सुरक्षित एवं आपदा-सहिष्णु समाज के निर्माण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने आपदा जोखिम आकलन, पूर्व चेतावनी प्रणाली, सुरक्षित निर्माण और सामुदायिक सहभागिता को प्रभावी आपदा प्रबंधन के प्रमुख आधार बताया।
सहायक आचार्य डॉ. रवीन्द्र नाथ ने आपदा प्रबंधन में पर्यावरण संरक्षण, प्रशासनिक तैयारियों और स्थानीय समुदायों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्य जितने जरूरी हैं, उतना ही महत्वपूर्ण आपदा से पहले सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण और जागरूकता है। अनियोजित नगरीकरण, प्राकृतिक जल निकासी मार्गों पर अतिक्रमण और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी समस्याएं आपदा के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। ऐसे में सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
वक्ताओं ने कहा कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण केवल सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें शैक्षणिक संस्थानों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। आपदाओं के प्रति वैज्ञानिक समझ विकसित करने, सुरक्षा उपायों की जानकारी देने और समाज में जागरूकता बढ़ाने में शैक्षणिक संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आपदा जोखिम न्यूनीकरण के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराना और उन्हें सुरक्षित समाज के निर्माण के लिए जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना रहा। व्याख्यान में आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए पूर्व तैयारी, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता के महत्व को रेखांकित किया गया।

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