विजिलेंस जांच का हो रहा दुरुपयोग
सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ उप शाखा सलेमपुर ने सौंपा उच्च अधिकारी को ज्ञापन इन्होंने कहा कि लेखपाल फील्ड कर्मचारी है। जिसका सम्बन्ध जनता से सीधे होता है। जनता की भूमि विवाद सहित अधिकांश समस्याओं से सम्बन्धित संदर्भ निस्तारण हेतु लेखपाल के पास ही आते हैं। दो पक्षों के विवाद के निस्तारण सम्बन्धी की गयी कार्यवाही से किसी एक पक्ष का असंतुष्ट होना स्वाभाविक है। पंचायत / विकास विभाग की विविध योजनाओं हेतु भूमि उपलब्ध कराने एवं अवैध अतिक्रमण की स्थिति में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही से भी अतिचारी/प्रभावित व्यक्तियों का परिवार लेखपाल से दुश्मनी ठान लेता है और लेखपाल को क्षेत्र की राजनीति में घसीटने का भी प्रयास किया जाता है।इस प्रकार विधि विरूद्ध कार्य कराने में असफल एवं विविध कारणों से असंतुष्ट व्यक्ति लेखपालों के खिलाफ साजिश करके एण्टी करप्शन टीम द्वारा पकड़वाने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है।एण्टी करप्शन कार्यालय द्वारा सामान्य शिकायत के आधार पर वास्तविक तथ्यों का परीक्षण किए बगैर शिकायतकर्ता को उकसाकर स्वयं बोल बोल कर शिकायती प्रोर्थना पत्र लिखवाया जाता है और प्री ट्रैप जांच की कागजी औपचारिकता कर उसी दिन अथवा अगले दिन लेखपाल को फंसाने के विविध प्रयास करके गिरफ्तार कर लिया जाता है। अधिकांश प्रकरणों में शिकायत पत्र में उल्लिखित कार्य लेखपाल से सम्बन्धित भी नहीं होता है और न ही लेखपाल द्वारा कोई रिश्वत की मांग की गयी होती है। लेखपाल को सामने मिलने पर शिकायतकर्ता द्वारा जबरन उसकी जेब / हाथ / वाहन / कक्ष में पैसा रख दिया जाता है। टीम द्वारा जबरन पकड़कर लेखपाल के हाथ में पैसा रखवाकर अथवा पाउडर लगाकर अथवा अपने पाउडर लगे हाथ से लेखपाल का हाथ पकड़कर, पानी के गिलास में धुलवाये जाते हैं।दिनांक 04.10.2024 को जनपद महाराजगंज में लेखपाल द्वारा न कोई रिश्वत मांगी गयी और न ही रिश्वत प्राप्त की गयी फिर भी एक दलाल / साजिशकर्ता, को पैसा पकड़ाकर उसका सम्बन्ध लेखपाल से बताते हुए जबरन लेखपाल को गिरफ्तार कर लिया गया। विरोध किये जाने पर एण्टी करप्शन टीम द्वारा सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया गया कि लेखपाल द्वारा कोई पैसा नहीं लिया गया है जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस प्रकार के साजिशन / झूठा फंसाने की अनेकों घटनाएं हो चुकी है। प्रदेश के लेखपालों में झूठी घटनाओं के कारण आकोश व्याप्त है। उ०प्र० लेखपाल संघ भ्रष्टाचार का विरोधी है। किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार पर रोक लगाया जाना स्वच्छ प्रशासन एवं कल्याणकारी राज्य के लिए आवश्यक है किन्तु टार्गेट पूरा करने अथवा जनसामान्य में सरकारी कर्मचारियों की छवि खराब करने के उद्देश्य से किसी भी लेखपाल/कर्मचारी को साजिशन फंसाया जाना अथवा सामान्य शिकायत मात्र के आधार पर जबरन गिरफ्तार किया जाना कर्मचारी एवं उसके परिवार के भविष्य को बर्वाद करने जैसा बड़ा पाप है। एण्टी करप्शन / विजिलेन्स ट्रैप की कार्यवाही के पूर्व प्री ट्रैप जांच में यह अवश्य जांच कर ली जाए कि उक्त प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा पूर्व में लेखपाल / कर्मचारी के विरूद्ध रिश्वत मांगने की शिकायत प्रशासनिक स्तर पर की थी अथवा साजिशन फंसाने की नियत से प्रथम बार सीधे एण्टी करप्शन विभाग में ही शिकायत की गयी है। क्या उक्त कर्मचारी / लेखपाल के विरूद्ध पूर्व में भी अन्य कोई भ्रष्टाचार की शिकायत / कार्यवाही हुई है जिनके आधार पर उसे भ्रष्ट प्रवृत्ति का कर्मचारी मानते हुए ट्रैप की कार्यवाही की जा रही है। शिकायत में उल्लिखित कार्य लेखपाल दायित्व से सम्बन्धित है अथवा उच्च अधिकारी / न्यायालय से सम्बन्धित है। यदि शिकायतकर्ता का कार्य लेखपाल दायित्वों से सम्बन्धित न होने के बावजूद शिकायतकर्ता लेखपाल से कार्य कराने का विधि विरूद्ध प्रयास करता है।तो रिश्वत देने के प्रयास में उसके विरूद्ध मुकदमा पंजीकृत होना चाहिए। किसी दलाल / साजिशकर्ता के द्वारा
पैसा/रिश्वत लेने के आधार पर लेखपाल / कर्मचारी को गिरफ्तार करने पर रोक लगायी जाए। उपरोक्त तथ्यों के दृष्टिगत एण्टी करप्शन/विजिलेन्स विभाग को विस्तृत दिशा निर्देश जारी किया जाए।
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