देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जिला कृषि रक्षा अधिकारी रतन शंकर ओझा ने बताया है कि विगत वर्षों में धान-गेहूं फसल चक्र क्षेत्रों में तमाम खरपतवारों में अतिशय प्रयुक्त रसायनों के प्रति प्रतिरोधकता विकसित हो गयी है जैसे कनकी खरपतवार में आइसोप्रोट्यूरान के प्रति।खरपतवार नाशियों के प्रयोग में सावधानी आवश्यक है क्योकि उचित मात्रा, समय पर छिड़काव पानी की संस्तुत मात्रा फ्लैट फैन या फुलडजेट नोजल से छिड़काव द्वारा ही समुचित नियंत्रण संम्भव है। जिन खेतों में केवल चौडी पत्ती वाले खरपतवार हो वहां 2,4-डी या आलग्रिप (मेटसल्फ्यूरान मिथाइल ) का ही प्रयोग करें। जंगली पालक हेतु आलग्रिप का प्रयोग करें क्योंकि 2,4-डी से नियंत्रण नही होता। हिरनखुरी व मालवा का नियंत्रण केवल करफेंट्राजोल इथाईल (एफिनिटी) द्वारा व गजरी का केवल 2,4-डी द्वारा होता है। मंडुसी / गुल्ली डण्डा हेतु पेंडीमेथिलीन 30 ई०सी० 02लीटर / एकड़ 200 लीटर पानी में बुआई के तुरन्त बाद तथा 35 दिन बाद सल्फोसल्फ्यूरान 75 प्रतिशत डब्लू०जी० 13 ग्राम / एकड़ या क्लोडिनाफाप 15 डब्लू०पी० 160ग्राम / एकड़ या पिनोक्साडेन 5.1 ई०सी० 400 मिली०/एकड़ का छिड़काव करें। पेंडिमेथिलिन के प्रयोग में भूमि की उपरी सतह पर पर्याप्त नमी हो। केवल जंगली जई हेतु क्लोडिनाफाप या फिनोक्साप्राप या पिनोक्साडेन का प्रयोग करें। यदि चौडी पत्ती के खरपतवार इकट्ठा हो तो टोटल, एटलांटिस, एकार्ड प्लस या वेस्ता का प्रयोग करें। यदि गेंहू के कटाई के तुरन्त बाद ज्वार, मक्का या लोबिया बोना हो तो सल्फोसल्फ्यूरान, टोटल या एटलांटिस का छिड़काव न करें। खेत में मकोय (भटकुईया) हो तो करफेंट्राजोल इथाइल या ब्रोडवे का प्रयोग करे। फिनोक्साप्राप, क्लोडिनोफाप व सल्फोसल्फ्यूरान के साथ 2,4- डी0 या एफिनिटी या आलग्रिप मिलाकर छिड़काव करने से इन रसायनों का गुल्ली डंडा व जंगली जई पर नियंत्रण कम हो जाता है। इसलिए यदि गुल्ली डंडा / जई के लिए फिनोक्साप्राप आदि का प्रयोग किया गया हो तो उसके प्रयोग के कम से कम 7-10 दिन बाद ही 2,4-डी0 का अलग से छिड़काव करें।
मंडुसी, गुल्ली डंडा, कनकी के प्रति प्रतिरोधकता से बचाव हेतु हर साल खरपतवारनाशकों का अदल बदल कर प्रयोग करें। 2,4-डी0 व सल्फोसल्फ्यूरान का बिना हवा वाले दिन छिड़काव करें अन्यथा पास के खेतों की खड़ी सरसों या चने की फसल जल जायेगी । उपरोक्त किसी भी खरपतवारनाशी की संस्तुत मात्रा ही 150-200 लीटर पानी में प्रति एकड़ की दर से मिलाकर फ्लैट फैन नोजल युक्त मानव चालित स्प्रेयर से फसल पर एक समान छिड़काव करें। इस प्रकार उक्त विधियों को अपनाने से खरपतवारों का पूर्ण नियंत्रण कर खरपतवारों की रसायन प्रतिरोधकता कम की जा सकती है तथा अधिक फसल उत्पादन कर लाभ लिया जा सकता है।
नफरत की राजनीति पर तीखा प्रहार, लोकतंत्र बचाने का आह्वान सत्य, विवेक और मानवीय मूल्यों…
पुतलों का दहन नहीं, मन और समाज में छिपी बुराइयों का संहार ही दशहरे का…
देवरिया में मिठाई की दुकानों पर ‘टुडे’ का खेल! पुरानी मिठाई को ताजा बताकर बेचने…
ग्राहक के दो रुपये लौटाने से इनकार पड़ा महंगा, उपभोक्ता आयोग का बड़ा आदेश; जानिए…
यूपी विधान परिषद चुनाव 2026: वोट डालने से पहले जरूर जान लें ये जरूरी बात!…
फोटो सौजन्य से पीके तीन बच्चों को छोड़ प्रेमी संग गई थी महिला, मौत के…