सैकड़ों अधिवक्ताओं ने कोतवाली परिसर में दिया धरना, कोतवाल और दीवान के खिलाफ कार्रवाई की मांग; एएसपी के निष्पक्ष जांच के आश्वासन पर शांत हुआ मामला
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। शहर के सुभाष चौक के समीप मंगलवार को मामूली कहासुनी के बाद हुए विवाद में अधिवक्ता सुधाकर पांडेय के घायल होने और पुलिस की कथित पक्षपातपूर्ण कार्रवाई को लेकर अधिवक्ताओं का आक्रोश भड़क उठा। पुलिस पर एक आरोपी को बिना कार्रवाई के छोड़ने का आरोप लगाते हुए सैकड़ों अधिवक्ता कोतवाली परिसर पहुंच गए और धरना-प्रदर्शन कर अपना विरोध जताया। अधिवक्ताओं ने कोतवाली प्रभारी और दीवान यादव के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठाई।प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुभाष चौक के समीप अधिवक्ता सुधाकर पांडेय और राम नगीना मिश्रा तथा उनके पुत्र आलोक मिश्रा के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया, जिसमें अधिवक्ता सुधाकर पांडेय गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद अधिवक्ता सुधीर पांडेय की तहरीर पर पुलिस दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर कोतवाली ले आई। हालांकि, कुछ समय बाद एक आरोपी को छोड़ दिए जाने की जानकारी मिलने पर अधिवक्ताओं में नाराजगी फैल गई।पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए बड़ी संख्या में अधिवक्ता कोतवाली पहुंच गए। उनका आरोप था कि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। अधिवक्ताओं ने कोतवाली प्रभारी से अपनी आपत्ति जताते हुए न्यायोचित कार्रवाई की मांग की, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर जिला बार संघ के पदाधिकारियों को मौके पर बुलाया गया।
इसके बाद जिला बार संघ के अध्यक्ष वैभव कांत मिश्रा के नेतृत्व में संघ के पदाधिकारियों और सैकड़ों अधिवक्ताओं ने कोतवाली परिसर में धरना शुरू कर दिया। अधिवक्ताओं ने हमले के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही मामले में कथित लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध भी विभागीय एवं विधिक कार्रवाई की मांग की।स्थिति तनावपूर्ण होती देख अपर पुलिस अधीक्षक कोतवाली पहुंचे और अधिवक्ताओं से वार्ता की। उन्होंने बताया कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जांच एक सक्षम अधिकारी को सौंप दी गई है। जांच के आधार पर मुकदमा दर्ज कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।अपर पुलिस अधीक्षक के निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई के आश्वासन के बाद अधिवक्ताओं का आक्रोश शांत हुआ।
हालांकि, जिला बार संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही दोषियों और लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो अधिवक्ता व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
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