यूपी पंचायत चुनाव टल सकते हैं, ये दो बड़ी वजहें आईं सामने

विधानसभा चुनाव 2027 के बाद होने की बढ़ी संभावना

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब समय से न होने के संकेत मिल रहे हैं। दरअसल, अप्रैल–मई 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से टल सकते हैं। ऐसे में, राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि ये चुनाव अब विधानसभा चुनाव 2027 के बाद कराए जा सकते हैं। हालांकि, सरकार और विभागीय अधिकारी इस पर खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं।

पहली बड़ी वजह: बोर्ड परीक्षा और जनगणना

सबसे पहले, राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची 27 मार्च को प्रकाशित करने का कार्यक्रम तय किया है। इसी दौरान, यूपी बोर्ड की परीक्षाएं भी शुरू हो जाएंगी।

इसके बाद, मई–जून 2026 में जनगणना के पहले चरण के तहत हाउस लिस्टिंग सर्वे किया जाएगा। इस प्रक्रिया में, प्रदेशभर में पांच लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी तैनात रहेंगे। इससे पहले, इनके लिए व्यापक प्रशिक्षण भी कराया जाएगा। ऐसी स्थिति में, पंचायत चुनाव कराना मुश्किल माना जा रहा है।

दूसरी वजह: ओबीसी आरक्षण का पेंच

वहीं दूसरी ओर, त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए नियमों के अनुसार समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन जरूरी है। लेकिन, पिछले सात महीनों से इसका प्रस्ताव शासन में लंबित है।

अधिकारियों के मुताबिक, आयोग के गठन के बाद उसे अपनी रिपोर्ट देने में कम से कम तीन से चार महीने लगेंगे। यानी, यदि अगले महीने आयोग का गठन भी हो जाता है, तो भी उसकी रिपोर्ट जून 2026 से पहले आना मुश्किल होगा।

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इसके अलावा परिषद चुनाव और मानसून भी बाधा

इसके अलावा, जुलाई से प्रदेश में मानसून शुरू हो जाता है और आमतौर पर इस दौरान चुनावी प्रक्रिया से बचा जाता है। वहीं, अक्टूबर–नवंबर 2026 में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक कोटे की 11 सीटों पर चुनाव प्रस्तावित हैं।

इसके बाद, विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज हो जाएंगी। साथ ही, फरवरी 2027 में जनगणना के दूसरे चरण के तहत जाति और जनसंख्या गणना होनी है। ऐसे में, पंचायत चुनाव के लिए उपयुक्त समय मिलना कठिन माना जा रहा है।

अंत में: प्रधानों को प्रशासक बनाने की मांग

इसी बीच, ग्राम प्रधान संगठन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष कौशल किशोर पांडेय ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि यदि पंचायत चुनावों की तिथियां आगे बढ़ती हैं, तो राजस्थान की तर्ज पर वर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किया जाए।
उनका कहना है कि, इससे गांवों में विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार तय समय पर चुनाव कराती है, तो ग्राम प्रधान संगठन उसका स्वागत करेगा।

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Karan Pandey

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