आगरा(राष्ट्र की परम्परा)l यूनिफॉर्म सिविल कोड का सीधा मतलब है, सभी नागरिकों के लिए समान कानून फिर चाहे वो किसी भी धर्म, जाति, समुदाय या क्षेत्र से हो। इससे देश के सभी नागरिक समान रूप से प्रभावित होंगे। शादी-विवाह से लेकर तलाक, संपत्ति बंटवारे और बच्चा गोद लेने तक देश के सभी नागरिकों के लिए नियम-कानून एक समान होंगे।
इस संदर्भ में वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक चिंतक एवं समाजसेवी पंकज जैन ने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता पर बहस शुरू हो गई। पीएम मोदी ने पहली बार युसीसी पर खुलकर बात रखी और इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि, सरकार जल्द ही कानून ला सकती है। इसके आने से महिलाओं की स्थिति बेहतर होगी।देश में समान नागरिक संहिता लागू होती है तो सबसे ज्यादा फायदा महिलाओं को होगा। महिलाओं को समान हक मिलने से उनकी स्थिति में सुधार होगा। महिलाओं के साथ लैंगिक भेदभाव खत्म होगा और विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संरक्षण से संबंधित मामलों में समान अधिकार प्राप्त होगा। समान नागरिक संहिता कानून लागू होने से देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून व्यवस्था रहेगी। यह कानून में भेदभाव या असंगति के जोखिम को कम करेगी। पुरे विश्व में भारत की छवि एक धर्मनिरपेक्ष देश की है। भारत सबसे पुराना, सबसे बड़ा, सबसे कार्यात्मक और जीवंत लोकतंत्र हैं। जो वैश्विक शांति और सद्भाव को स्थिरता दे रहा है। ऐसे में कानून और धर्म का आपस में कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए। सभी लोगों के साथ धर्म से परे जाकर समान व्यवहार लागू होना जरूरी है,
बहरहाल स्थिति ये है कि देश में सभी नागरिकों के लिए एक समान ‘आपराधिक संहिता’ तो है, लेकिन समान नागरिक कानून नहीं है। ‘समान नागरिक संहिता का मतलब हर धर्म के पर्सनल लॉ में एकरूपता लाना है। फिलहाल देश में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं, जैसे हिंदुओं के लिए अलग एक्ट, मुसलमानों के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ। ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड का अर्थ एक निष्पक्ष कानून होगा, जिसका किसी धर्म से कोई ताल्लुक नहीं होगा। ये सबके लिए समान होगा।
जैन ने कहा यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने से हर धर्म के लिए एक जैसा कानून आ जाएगा। इसके तहत हर धर्म के कानूनों में सुधार और एकरूपता लाने पर काम होगा और यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने से हिंदुओं, बौद्ध, जैन, मुसलमानों ,बौद्ध, जैन, ईसाइयों और पारसियों सहित अन्य के सभी तरह के पर्सनल कानून निरस्त हो जाएंगे। यूसीसी लागू होते ही देशभर में सभी धर्मों के नागरिकों के लिए शादी, तलाक, बच्चा गोद लेने और संपत्ति के बंटवारे को लेकर एक जैसे नियम-कानून होंगे। यूसीसी लागू होने से शादी की उम्र एक समान होगी। बिना पंजीकरण के शादी मान्य नहीं होगी। शादी का पंजीकरण नहीं कराने वाले परिवारों को सरकारी योजनाओं या सुविधाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा। किसी भी धर्म के व्यक्ति को पत्नी के रहते एक से ज्यादा शादी करने पर रोक लग जाएगी। तलाक के लिए भी पति और पत्नी, दोनों को समान अधिकार मिलेंगे। उत्तराधिकार के मामले में माता-पिता की संपत्ति में बेटा और बेटी को बराबर हक मिलेगा। वहीं बच्चा गोद लेने के मामले में भी सभी के लिए समान कानून लागू होंगे। भारत जैसे विविधता वाले देश में सभी नागरिकों को अपने-अपने धर्मों के हिसाब से जीने की आजादी है। लेकिन समान नागरिक संहिता लागू होने जाने के बाद एक समान कानून के साथ ही सभी धार्मिक समुदायों के लिए विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने के नियम भी एक समान हो जाएंगे। कॉमन सिविल कानून देश की न्याय प्रणाली और विकास के लिए बेहतर हैं। ‘हर धर्म के अलग-अलग कानूनों से न्यायपालिका पर बोझ पड़ता है। कॉमन सिविल कोड देश की एकरूपता और न्याय प्रणाली के लिए बेहतर साबित होगा। समान नागरिक संहिता समाज और आपके विकास पथ के लिए सबसे सुरक्षित गारंटी हैं।
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