कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’ की दो कविताएं

वर्षा का यह जल संचय कर लें
——XXXXX——
झूम झूम के बरसीं बरखा रानी
सावन के महीना, वर्षा का पानी,
खेत-खलिहान नदी-तालाब सब,
गाँव शहर लबालब हैं पानी पानी।

जेठ आषाढ़ सभी अति तरसे,
बूंद बूंद को तरसी धरती माता,
मानसून देखो आया सावन में,
हरियाली फैली है सारे जग में।

गाँवों शहरों में झूम झमाझम
जलमग्न हो गईं सारी सड़कें,
उमड़-घुमड़ कर गरज रहे हैं,
काले भूरे मतवाले बादल हैं।

भू स्खलन हो रहा पहाड़ों पर,
जान माल की हानि हो रही है,
इन्द्र देवता की अत्यन्त कृपा है,
या उनकी दृष्टि अत्यंत कुपित है।

पर रूखे सूखे पेड़ों पौधों में अब
हरियाली की जान आ गयी है,
धानी चुनर ओढ़ ली धरती माँ ने,
झूले पड़ गये प्रकृति संवर गई है।

वर्षा का यह जल संचय कर लें,
आओ मिलकर प्रबंध करें ऐसा,
वर्ष भर का जल संचित धरती में,
आदित्य हम सब उपाय करें ऐसा।

अपना गाँव-अपना बचपन
——XXXXX——
एक मील लम्बा बसा गाँव मेरा,
नाव सथनी बाला खेड़ा,
कई एक नाई काका, कई एक
बढ़ई काका, माली काका,
और कई एक लुहार काका,
कुम्हार और हलवाई काका,
कच्चे पक्के घर थे, लम्बा गलियारा,
हर मनई बहुतै दिलदार था,
एक मील लम्बा बसा गाँव मेरा …..।

कही भी किसी के घर खा लेते,
हर घर में भोजऩ तैयार था,
खेतों की सब्जी, लोबिया की
छियाँ खूब मजे से खाते थे,
जिसके आगे शाही पनीर और
गाजर का हलुआ भी बेकार था,
एक मील लम्बा बसा गाँव मेरा……।

दो मिऩट की मैगी नही ही होती
थी, पर दुधबड़ियाँ तैयार थे,
आम, जामुन, नीम की छांव और
पीपल, बरगद सदा बहार थे …
अपने गाँव के देशी आम, अमरूद,
खीरा, ककड़ी, भुट्टों का भरमार था,
कजरीतीज का दंगल और फागुन
की होली रंगों का त्योहार था,
एक मील लम्बा बसा गाँव मेरा……।

मुल्तानी माटी,रीठा से तालाबों
कुओं में जा जा कर नहाते थे ,
न साबुन, न सैंपू, न महकुआ
तेल, हमरे ख़ातिर सब बेकार थे,
कबड्डी व गिट्टी फोड़ खेलते थे,
हमे नहीं क्रिकेट का खुमार था,
एक मील लम्बा बसा गाँव मेरा …..।

कहानी दादी नानी की सुनते,
रेडीओ, टी वी न अखबार था,
संग साथियों के घूम घूम कर
खुश थे, चाचा ताऊ का प्यार था,
गाय, भैंस अपनी थी, बैल गाड़ी
और टेढ़ा, बीघापुर का बाज़ार था,
बुलट थी न बाइक थी और नही
कार थी, घोड़े पर एक्का सवार था,
एक मील लम्बा बसा गाँव मेरा…..।

कूटीबाबा, ठाकुरद्वारा, हाँसूपुर,
अंबिका देवी, चंदिकन धाम,
महावीरन में बड़े मंगल के मेला,
सावन शिवजी का शृंगार था,
गाँव के प्राइमरी व मिडिल स्कूल
में कई गावों के पढ़ने वाले बच्चे,
हुबलाल कालेज में प्रिन्सिपल श्री
हरिश्चंद्र भार्गव की ग्रामर की कक्षा,
एक मील लम्बा सा गाँव मेरा….।

आज इस अनजान से शहर में वो
प्यार वो इज़्ज़त कहाँ से लाऊं,
यही सोच सोच कर, हम गाँव
गेरावँ के देहाती बहुत दुख पाऊं,
वो बचपन का समय आदित्य
फिर आ जाय, तो बहुतै मजा पाऊँ,
फिर से असल जिन्दगी जी पाऊं,
उस माटी को सिर माथे लगाऊँ,
एक मील लम्बा बसा गाँव मेरा,
नाव सथनी बाला खेड़ा ।
एक मील लम्बा बसा गाँव मेरा,
नाव सथनी बाला खेड़ा ।

कर्नल आदि शंकर मिश्र’आदित्य’

rkpnews@desk

Recent Posts

सपा की मासिक बैठक में संगठन मजबूती पर जोर, एसआईआर पर हुई चर्चा

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। मासिक बैठक में समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने संगठन की मजबूती और…

27 seconds ago

कमर्शियल एलपीजी आवंटन 50% तक बढ़ा, व्यापारिक वर्ग को राहत

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)l भारत सरकार ने कमर्शियल एलपीजी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए…

13 minutes ago

मिशन शक्ति 5.0 के तहत त्वरित कार्रवाई 24 घंटे में गुमशुदा महिला बरामद

शाहजहांपुर( राष्ट्र की परम्परा)l जैतीपुर संचालित “मिशन शक्ति 5.0 अभियान के अंतर्गत थाना जैतीपुर पुलिस…

20 minutes ago

साइबर ठगी के शिकार व्यक्ति को वापस मिले पैसे

बलिया(राष्ट्र की परम्परा) थाना गड़वार पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से साइबर ठगी का…

2 hours ago

स्वच्छता पखवाड़ा में गूंजा स्वच्छ गंगा-स्वस्थ जीवन का संदेश, श्याम काट में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। नमामि गंगे अभियान के अंतर्गत 16 से 31 मार्च तक संचालित…

2 hours ago

सागौन चोरी करने वाले 03 शातिर चोर अरेस्ट, संत कबीर आश्रम मगहर के पास दबोचे गए

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में सागौन के पेड़ों की कटाई कर चोरी…

2 hours ago