Monday, March 23, 2026
Homeउत्तर प्रदेश'आदित्य' की दो कविताएं

‘आदित्य’ की दो कविताएं

१- हर मनोकामना आपकी पूर्ण हो

शुभ पर्व प्रकाश है दीपावली का,
सभी प्रियजनो को हार्दिक बधाई,
व अनन्त शुभकामनायें प्रस्तुत हैं,
खील, लाई ,शुद्ध घी की मिठाई।
दीपमालिका किरणें रोशन हो,
आपके जीवन में नवचेतना भरें,
नव उत्साह, नव स्वाभिमान से,
जीवन आपका ओतप्रोत कर दें।

ऋद्धि-सिद्धि, धन-धान्य और
सुख-शान्ति, मान-सम्मान हो, स्वास्थ्य-समृद्धि के साथ साथ
हर मनोकामना आपकी पूर्ण हो।
आदित्य मन मस्तिष्क निर्मल हों,
प्रेम उत्साह से सराबोर सभी हों,
दीप पर्व में पूर्ण उत्साह जोश हों,
माता लक्ष्मी श्रीगणेश प्रसन्न हों।


२- अच्छाई की शुरुआत स्वयं से करना पड़ता है :

जीवन में अच्छाई की शुरुआत तो
हमको स्वयं से ही करना पड़ता है,
किसी के मस्तक पर तिलक लगाने
से पहले खुद की उंगली पर लगता है।

बिना फलों वाले सूखे पेंड़ पर भूल
कर कभी कोई पत्थर नहीं मारता है,
पत्थर तो उसी पेंड़ पर मारे जाते हैं
दोस्तों जो फलों से लदा होता है ।

व्यक्तित्व, चरित्र अच्छे हों तो उसकी
बुराई करने वाला अवसर पा जाता है
जो बुराइयों का ख़ज़ाना हो उसकी
तरफ़ कोई आँख भी नहीं उठाता है।

सर्वगुण सम्पन्न हो तो सुंदर रूप
ज्यादा ही सुंदर लगने लगता है,
विनम्रता मनुष्य में आने से उसकी
विद्वता का पूरा प्रमाण मिलता है।

दान पुण्य करने के काम आये धन
तो दान कर्ता का वैभव और बढ़ता है,
साहस बुद्धि सुसज्जित शस्त्राग़ार हो
तो राजपूताना समाज भी सजता है ।

भूखे पेट को भोजन मिले तो उस
सम्राट का अन्न भंडार बढ़ता है,
आदित्य जोश के साथ होश हो तो
बिगड़ा काम भी चुटकी में बनता है।

कर्नल आदि शंकर मिश्र, आदित्य

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