मेरी रचना-मेरी कविता
सत्य बोलना हमेशा लाभप्रद होता है,
सत्य वचन याद नहीं रखना होता है,
सत्य सदा सरल व निष्छल होता है,
हाँ, पर सत्य अक्सर कड़वा होता है।
स्वप्न में दिखी मुलाक़ात नहीं होती है,
प्रेम के दो शब्दों से इश्क़ नहीं होती है,
धरती से मिलन को आसमान रोता है,
ज़माना उसी को बरसात समझता है।
तन स्वस्थ, तो पूजा आसान होती है,
मन की स्वस्थता ईश्वर दिखा देती है,
मंदिर पहुँचना तो शरीर साधन है,
प्रभू तक पहुँचना तो मन साधन है।
जो सकारात्मक सोच से क़र्म करते हैं,
उनकी समस्या का समाधान होता है,
जिनकी सोच नकारात्मक होती है,
तो समस्या का हल, समस्या होती है।
यदि शरीर में दर्द का एहसास हो,
तो शरीर में प्राण मौजूद होते हैं,
और जिसके मन में दूसरों का दर्द
महसूस हो तो वही इंसान होते हैं।
कहते हैं कि पतंग की डोर लम्बी हो,
तो यह मत मानिये, पतंग ऊँचे उड़ेगी,
हाँ! उड़ाने की अक़्ल होगी तभी पतंग,
ऊँचे से ऊँचे आसमान पर जा उड़ेगी।
दौलत आसानी अर्जित हो जाती है,
तो आदित्य उसका गर्व स्वाभाविक है,
यही दौलत जब मेहनत व ईमान से,
मिले तो जीवन सार्थक हो जाता है।
कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ
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