आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों में भयंकर चक्रवाती तूफान “मोंथा” ने तबाही मचा दी है। मंगलवार को इस प्रचंड चक्रवात का लैंडफॉल शुरू होते ही कई जिलों में भारी बारिश और 120 किमी/घंटा तक की रफ्तार से चल रही हवाओं ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया।
आंध्र प्रदेश के कोनासीमा जिले के मकानगुडेम गांव में तेज आंधी के कारण एक पेड़ उखड़कर एक महिला पर गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। नेल्लोर और आसपास के जिलों में पिछले 36 घंटों से बारिश थमने का नाम नहीं ले रही है। मौसम विभाग ने अगले 12 घंटों तक भारी वर्षा और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। समुद्र में 15 से 20 फीट ऊंची लहरें उठ रही हैं, जिससे तटीय क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है।
वहीं ओडिशा के 15 जिलों में जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है। गजपति जिले में भूस्खलन हुआ, जबकि रायगढ़ और गुदारी इलाकों में पेड़ उखड़ गए।
ओडिशा सरकार ने 2000 से अधिक चक्रवात आश्रय स्थल तैयार किए हैं और 6,000 से ज्यादा एनडीआरएफ, ओडीआरएएफ व फायर सर्विस कर्मियों को राहत कार्यों में तैनात किया है। हालात को देखते हुए 9 जिलों में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को 30 अक्टूबर तक बंद रखा गया है।
झारखंड तक “मोंथा” का असर देखने को मिल रहा है। राजधानी रांची समेत कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने 30 अक्टूबर तक भारी बारिश की संभावना जताई है।
इस बीच, तूफान के कारण 32 उड़ानें और 180 से अधिक ट्रेनें रद्द की जा चुकी हैं। पूर्वी तट रेलवे और दक्षिण मध्य रेलवे ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई रूट बदल दिए हैं।
मोंथा का प्रकोप अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ने की उम्मीद है, लेकिन तबाही के निशान लंबे समय तक याद रहेंगे।
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