हमारी ख़ुशी में सबसे बड़ी अड़चन
शायद हमारी अपनी सोच होती है,
क्योंकि हमारी सोच अपने आपको
औरों से बहुत कमतर आँकती है।
हमारी इच्छा का महत्व बड़ा नहीं है,
महत्व निर्णय लेने की क्षमता का है,
निश्चय का महत्व अधिक होता है
क्योंकि निश्चय सब बदल देता है।
पौधा वृक्ष बनने में सालों लगते हैं,
पर तूफ़ान एक झटके में गिरा देता है,
विश्वास स्थिर होने में सालों लगते हैं,
परंतु टूटने में एक पल नहीं लगता है।
इंसान की मूर्खता ऐसा दुर्गुण है जो
उसे एक कमज़ोर कड़ी बना देता है,
स्वभावत: वह अच्छाइयों कभी भी
कहीं भी ग्रहण नहीं कर पाता है।
बल्कि उसकी यह कमी एक नेत्रहीन
व्यक्ति के अंधेपन जैसी होती है जो
निर्मल दर्पण से भी अपना स्वयं का
चेहरा भी देखने में असमर्थ होता है।
जबकि इंसान का अच्छा स्वभाव
हृदय को भी आकर्षित कर लेता है,
जैसे सुंदरता हर किसी का ध्यान
अपनी ओर आकर्षित कर लेती है।
तात्पर्य यह है कि एक सकारात्मक
सोच हर हाल में अवसर ढूँढ लेती है,
और नकारात्मक सोच हर हाल में
आदित्य ग़लतियाँ ही ढूँढ पाती है।
कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ
नवनीत मिश्र भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में गणेशशंकर विद्यार्थी का नाम एक ऐसे जुझारू…
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Sonia Gandhi की…
Iran War Day 24: ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध के 24वें दिन वैश्विक…
सुप्रीम कोर्ट का फैसला केवल एक कानूनी व्याख्या नहीं, बल्कि भारतीय संविधान की मूल भावना,ऐतिहासिक…
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग द्वारा विश्व क्षय रोग…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर…