Wednesday, January 28, 2026
HomeUncategorizedपेड़ी प्रबंधन के लागत में आएगा 60% की कमी

पेड़ी प्रबंधन के लागत में आएगा 60% की कमी

उतरौला,बलरामपुर(राष्ट्र की परम्परा)।सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड उतरौला में फार्म मशीनरी बैंक का स्थापना किया गया है। जिसमें 6 फीट का मल्चर ,7 फीट का मल्चर,एम० बी० पलाउ एवं एक 55 हॉर्स पावर का ट्रैक्टर कृषकों को न्यूनतम किराए पर उपलब्ध है।अब फार्म मशीनरी बैंक में एक नया यंत्र आर०एम०डी० मंगाया गया है। नरेंद्र सिंह ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक गन्ना विकास परिषद उतरौला द्वारा बताया गया की पेड़ी प्रबंधन यंत्र द्वारा पेड़ी फसल के प्रबंधन में किए जाने वाले सभी कार्य जैसे ठूठों की छटाई, उसके आसपास की निराई गुड़ाई, पुरानी जड़ो की कटाई, खाद उर्वरक, जैव उर्वरक एवं कृषि रसायनों का प्रयोग तथा मिट्टी चढ़ाने आदि सभी कार्य एक ही साथ निष्पादित किए जाते हैं। इस यंत्र द्वारा एक घंटे में लगभग 0.300 हैकटेयर कार्य करने की क्षमता है। इस यंत्र के प्रयोग से लागत में 60% तक की बचत हो जाती है। पेड़ी प्रबंधन यंत्र कृषकों के लिए काफी लाभकारी सिद्ध होगा। साथ ही समिति क्षेत्र में गन्ना कृषकों को इसका अत्यधिक फायदा मिलेगा। इस यंत्र के प्रयोग करने के पश्चात यदि कृषकों द्वारा गैप फिलिंग कर दिया जाए तो पेड़ी प्रबंधन के प्रारंभिक चरण में किए जाने वाले संपूर्ण कार्य पूर्ण हो जाएंगे।इस प्रकार पेड़ी गन्ने से भी कृषक अधिक उपज प्राप्त कर सकेंगे। सिंह द्वारा आगे बताया गया कि फार्म मशीनरी बैंक के यंत्र एम०बी०प्लाऊ द्वारा कृषक गहरी जुताई कर सकते हैं। प्रत्येक किसान भाइयों को कम से कम 3 वर्ष में एक बार सब सायलर, चिजलर अथवा एम०बी० पलाऊ से एक बार गहरी जुदाई अवश्य करनी चाहिए। इससे कठोर परत टूट जाती है, जिससे मृदा में वायु संचार, जलधारण क्षमता, जड़ों का विकास एवं मृदा से पोषक तत्व ग्रहण करने की क्षमता में वृद्धि होती है। सितंबर अक्टूबर महीने में होने वाले बारिश एवं तेज हवा में भी गन्ने का फसल नहीं गिरता है। इस यंत्र का किराया 45 रुपया प्रति घंटा है। ट्रैक्टर का किराया 735 रुपए प्रति घंटा है। दोनों यंत्र एक साथ लेने पर साथ 770 रुपए प्रति घंटा किराया भुगतान करना होगा। इसी प्रकार समिति के फार्म मशीनरी बैंक में 6 फीट एवं 7 फीट का मल्चर उपलब्ध है। मल्चर के द्वारा गन्ने की पताई का प्रबंध किया जाता है। इस यंत्र के द्वारा गन्ने के पत्ती को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर मिट्टी में मिला दिया जाता है। इस यंत्र के कारण गन्ने के ठूठों की छटाई हो जाने से पेड़ी की फसल भी अच्छी होती है। यह यंत्र किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। अब वे गन्ने की पत्ती को जलाते नहीं है, बल्कि इसे मल्चिंग कर खेत में ही खाद तैयार कर लेते हैं। इस यंत्र के प्रयोग ने वायु प्रदूषण कम कर पर्यावरण पारिस्थितिकी के संतुलन में सहयोग किया है। 6 फीट के मल्चर का किराया ₹46 प्रति घंटा तथा 7 फीट के मल्चर का किराया 47 रुपया प्रति घंटा है। यह सारे यंत्र समिति के फार्म मशीनरी बैंक में न्यूनतम दरों पर उपलब्ध है। समिति क्षेत्र के गन्ना कृषक अपने सर्किल गन्ना पर्यवेक्षक से मिलकर किराए पर इन यंत्रों का अपनी खेती बाड़ी में उपभोग कर सकते हैं। फार्म मशीनरी बैंक में कृषकों के जरूरत के अनुसार भविष्य में और अधिक यंत्र मांगे जाएंगे। निश्चित रूप से समिति क्षेत्र के किसान इससे लाभान्वित होंगे और अपने गन्ने की उत्पादन उत्पादकता में वृद्धि कर सकेंगे। आर०एम०डी० का विधि प्रदर्शन नरेन्द्र सिंह ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक द्वारा प्रचार प्रसार प्रभारी अतुल कुमार सिंह के साथ समिति क्षेत्र के ग्राम एलरा में कृषक राधेश्याम वर्मा के खेतों पर कराया गया। इस अवसर पर काफी संख्या में क्षेत्रीय कृषक भी मौजूद रहे।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments