देवरिया मेडिकल कॉलेज प्रकरण में हुई कारवाई मिले कार्यवाहक प्रधानाचार्य

देवरिया मेडिकल कॉलेज के साए में छिपा सच — टंकी में मिले शव ने खोली अस्पताल तंत्र की परतें, अब जनता जवाब चाहती है ?

नेताओं ने कॉलेज प्रशासन पर साधा निशाना, पर जिला अस्पताल की लापरवाही पर सन्नाटा — सवालों के घेरे में सरकारी एम्बुलेंस का दुरुपयोग

देवरिया। (राष्ट्र की परम्परा)महर्षि देवरहवा बाबा मेडिकल कॉलेज की टंकी में मिला शव केवल एक मौत नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर खड़े होते सवालों की गूंज बन गया है।
नेताओं से लेकर सामाजिक संगठनों तक सबने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया, पर जिला अस्पताल प्रशासन पर किसी ने उंगली नहीं उठाई। आनन-फानन में प्रधानाचार्य को हटा डॉ रजनीश को कार्यवाहक प्रधानाचार्य बना दिया गया।

कार्यवाहक प्रधानाचार्य डॉ रजनी

अब जनता के मन में एक ही सवाल है — आखिर 15 दिनों से अधिक समय से टंकी में पड़ा मृतक कौन था? किसका बेटा, भाई या पिता था? कितने बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया?
पुलिस जांच में जुटी है, लेकिन अभी भी सभी अंधेरे में तीर चला रहे हैं। कोई कहता है कि यह अखड़ स्वभाव वाले प्रधानाचार्य की नाराजगी का परिणाम है, तो कोई इसे किसी अस्थायी कर्मचारी या ठेकेदार से जुड़ी साजिश बता रहा है।

मरीज नहीं देवरिया के एम्बुलेंस में कबाड़ रखा जाता

ग्रामीण अंचलों में कही जाने वाली कहावत “ज्यादा बोले तो मिट्टी नहीं मिलेगी” अब इस घटना पर सटीक बैठती नजर आ रही है। क्या यह हत्या उसी मानसिकता का परिणाम है? यह तो जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। पर जनता को उम्मीद है कि पुलिस जल्द ही असली अपराधी को बेनकाब करेगी।

इस बीच, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें देखा गया कि अस्पताल की सरकारी एम्बुलेंस, जो जनसेवा के लिए खरीदी गई थी, अब कबाड़खाना बन चुकी है। सरकारी धन का दुरुपयोग और व्यवस्था की लापरवाही साफ झलकती है।

देवरिया अस्पताल का यह दृश्य बताता है कि कुछ अधिकारी न तो सरकार की नीति सुनते हैं और न जनप्रतिनिधियों की बात मानते हैं। सरकार की छवि धूमिल हो रही है और जनता का भरोसा डगमगा रहा है।

अब जनता की नजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर है — जो प्रशासन में सख्ती के लिए जाने जाते हैं। यदि इन कुछ ‘करीबी अधिकारियों’ पर नकेल नहीं कसी गई तो ये “विभीषण” बनकर सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
दिवाली से पहले देवरिया को इन अफसरों से मुक्त कर ‘स्वर्णिम देवरिया’ की ओर लौटने का समय आ गया है।

Editor CP pandey

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