मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। हिंदू समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता, संगठन और संस्कारों में निहित है। जब समाज जागरूक होकर एकजुट होता है, तभी राष्ट्र सशक्त और सुरक्षित बनता है। युवाओं को अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को समझते हुए राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक (पूर्वी उत्तर प्रदेश) अनिल जी ने व्यक्त किए।
वे मधुबन नगर पंचायत के पांती रोड स्थित गांधी मैदान में आयोजित हिंदू सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। अनिल जी ने कहा कि हिंदू समाज को सकारात्मक सोच के साथ संगठित होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना होगा। भारत को जो गौरवपूर्ण स्थान विश्व में प्राप्त हुआ है, उसके पीछे यहां की संत परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति की बड़ी भूमिका रही है।
सनातन धर्म जीवन जीने की कला
क्षेत्र प्रचारक अनिल जी ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। सनातन एक अवधारणा, एक वृत्ति और एक जीवनशैली है, जिसे केवल शब्दों या कर्मकांड तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म “वसुधैव कुटुंबकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे मूल मंत्रों के माध्यम से समस्त मानवता के कल्याण की बात करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि पूरे ब्रह्मांड में धर्म एक ही है—सनातन धर्म, शेष सभी पंथ और संप्रदाय हैं। जो सर्वग्राही और सर्वव्यापी है, वही सनातन है।
राष्ट्र सर्वोपरि, यही सनातन का मूल
अनिल जी ने कहा कि सनातन धर्म से भी बड़ा राष्ट्र धर्म है। सच्चा सनातनी वही है, जो राष्ट्रहित में त्याग और बलिदान के लिए सदैव तैयार रहता है। सनातन समाज ने इतिहास में अत्याचार सहना स्वीकार किया, लेकिन अपने धर्म और संस्कृति पर आंच नहीं आने दी।
उन्होंने कहा कि भारत माता की जय और वंदे मातरम के उद्घोष से देशभक्ति प्रमाणित होती है और जो सनातन को मानता है, वही संविधान का भी सम्मान करता है।
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सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
क्षेत्र प्रचारक ने सामाजिक समरसता का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि प्राचीन भारत में छुआछूत होती, तो राजा दशरथ और सुमंत एक ही गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त नहीं करते। यह भारत की समरस संस्कृति का प्रमाण है।
उन्होंने माता सीता, लव-कुश के प्रसंग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और वृक्षों के संरक्षण का संदेश दिया तथा जल संरक्षण के लिए मातृशक्ति से विशेष आग्रह किया।
कर्तव्यों की चर्चा से बनेगा भारत विश्वगुरु
अनिल जी ने कहा कि आज अधिकारों की चर्चा अधिक और कर्तव्यों की चर्चा कम हो रही है। जब समाज कर्तव्यों को प्राथमिकता देगा, तभी भारत पुनः विश्वगुरु बनेगा। उन्होंने लोगों से अंग्रेजी के स्थान पर हिंदी में हस्ताक्षर करने का भी आह्वान किया।u
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अन्य वक्ताओं के विचार
सम्मेलन में मातृशक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रख्यात कथावाचिका डॉ. रागिनी मिश्रा ने लव जिहाद की घटनाओं पर चिंता जताई और माताओं-बहनों से बच्चों को घर में ही संस्कार देने का आग्रह किया।
खाकी दास बाबा कुटी के महंत रामकिशोर दास जी ने कहा कि हिंदू समाज अब संगठित हो रहा है और पुरानी भूलों से सीख लेकर आगे बढ़ रहा है।
सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता विमल श्रीवास्तव ने की, जबकि संचालन अमित गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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