श्रीहरि विष्णु की कथा: जब-जब धरती पर बढ़ा अधर्म, तब-तब हुआ उनका अवतार

विष्णु भगवान की दिव्य लीला: सृष्टि के पालनहार की अनंत महिमा

🌿 सनातन धर्म के त्रिदेवों में भगवान विष्णु को पालनहार की उपाधि प्राप्त है। जहां ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना करते हैं और भगवान शिव उसका संहार करते हैं, वहीं श्रीहरि विष्णु समस्त ब्रह्मांड का पालन-पोषण करते हैं। उनका प्रत्येक अवतार किसी विशेष उद्देश्य से जुड़ा है — जब-जब अधर्म बढ़ता है और धर्म संकट में आता है, तब-तब प्रभु विष्णु स्वयं अवतरित होकर संसार में संतुलन स्थापित करते हैं। हम भगवान विष्णु की दिव्य लीलाओं, उनके अवतारों की रहस्यमयी गाथाओं और उनके आराधन से मिलने वाले आध्यात्मिक फलों पर विस्तृत प्रकाश डालेंगे।

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🌺 श्रीहरि विष्णु की लीला का सार
विष्णु भगवान की महिमा का वर्णन वेद, पुराण और उपनिषदों में असंख्य रूपों में मिलता है। उनकी लीला अनंत है — न आदि है, न अंत। वे स्वयं कहते हैं कि “मैं ही सृष्टि का कारण हूं, मुझसे ही सब प्राणी उत्पन्न होते हैं और अंततः मुझमें ही लीन हो जाते हैं।”
समुद्र मंथन की कथा इसका अद्भुत उदाहरण है — जब देवता और असुर अमृत पाने के लिए मंथन कर रहे थे, तब प्रभु ने कूर्म अवतार लेकर सागर के भीतर मेरु पर्वत को स्थिर किया। यही नहीं, जब अमृत कलश असुरों के हाथ लगने का संकट आया, तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत प्रदान किया।
इन लीलाओं से यह सिद्ध होता है कि भगवान विष्णु न केवल सृष्टि के रक्षक हैं, बल्कि धर्म की रक्षा हेतु सदैव तत्पर रहते हैं।

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🌼 विष्णु के प्रमुख अवतारों की अद्भुत गाथा
भगवान विष्णु के दस प्रमुख अवतारों में से प्रत्येक अवतार किसी विशेष उद्देश्य से हुआ —
मत्स्य अवतार में उन्होंने वेदों की रक्षा की,
कूर्म अवतार में सृष्टि का संतुलन बनाया,
वराह अवतार में पृथ्वी को जल से बाहर निकाला,
नरसिंह अवतार में भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए राक्षस हिरण्यकशिपु का अंत किया,
वामन अवतार में उन्होंने राजा बलि को विनम्रता का पाठ पढ़ाया,
परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि अवतार तक, हर युग में विष्णु भगवान ने धर्म की स्थापना की है।
प्रत्येक अवतार एक संदेश देता है — “अहंकार, अन्याय और अधर्म का अंत निश्चित है।”

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🌸 भक्ति का मार्ग और श्रीहरि का स्मरण
भगवान विष्णु की आराधना करने वाला व्यक्ति जीवन में कभी भी भय, दुर्भाग्य या दुख से परास्त नहीं होता। श्रीहरि के नाम का जाप, विशेषकर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का स्मरण मन को स्थिरता, आत्मिक शांति और जीवन में दिशा प्रदान करता है।
गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। इस दिन पीले वस्त्र धारण कर, तुलसी पत्र और पीले पुष्पों से उनकी पूजा करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है और नकारात्मक शक्तियाँ दूर भागती हैं।

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🌿 विष्णु और लक्ष्मी: दिव्य युगल का अद्भुत संतुलन
जहां भगवान विष्णु संरक्षण के प्रतीक हैं, वहीं माता लक्ष्मी समृद्धि और सौभाग्य की प्रतीक हैं। दोनों का संगम ही जीवन में पूर्णता लाता है। पुराणों के अनुसार जब विष्णु भगवान शेषनाग पर शयन करते हैं, तो लक्ष्मी जी उनके चरणों की सेवा में रहती हैं। यह दृश्य हमें त्याग और समर्पण का अद्भुत संदेश देता है — कि सच्चा प्रेम ईश्वर की भांति निस्वार्थ होता है।

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🌻 विष्णु की उपासना से जीवन में परिवर्तन
जो व्यक्ति श्रद्धा, प्रेम और विश्वास के साथ विष्णु भगवान की भक्ति करता है, उसके जीवन से सारे क्लेश स्वतः समाप्त हो जाते हैं। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से मानसिक शांति, धन और वैभव की प्राप्ति होती है।
यह भी कहा गया है कि जो व्यक्ति विष्णु भगवान के नाम का ध्यान करके दिन की शुरुआत करता है, उसका दिन मंगलमय रहता है।
भगवान विष्णु सिखाते हैं कि धर्म का मार्ग कठिन अवश्य है, परंतु वही मुक्ति का पथ है।

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🌺विष्णु भगवान केवल एक देवता नहीं, बल्कि जीवन के संतुलन के प्रतीक हैं। उनकी हर कथा हमें यह सिखाती है कि सत्य, करुणा और कर्तव्य का पालन ही सर्वोच्च भक्ति है।
जब-जब मन विचलित हो, विष्णु के नाम का स्मरण करें, क्योंकि श्रीहरि की कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है।
भगवान विष्णु का यह संदेश सदा गूंजता रहे —
“धर्मो रक्षति रक्षितः।”
(जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।)

Editor CP pandey

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