बड़े बुजुर्गों द्वारा युवाओं को मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के तरीकों पर मार्गदर्शन करना समय की मांग

गोंदिया -Rkpnews वैश्विक स्तरपर दीपावली को हर देश में हर मूल भारतीयों सहित अनेकों द्वारा बड़े ही जोश और उत्साह से मनाया जाता है। इसीलिए यह त्यौहार अब सिर्फ भारतीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तरीय हो गया है। हालांकि इसे भारत में बहुत ही विशाल स्तर पर मनाया जाता है। मेरा मानना है कि दीपावली सभी हिंदू त्योहारों में सबसे बड़ा पर्व है जिसे भारत के हर समाज वर्ग जाति धर्म द्वारा उत्साह पूर्वक मनाया जाता है। दीपावली उत्सव के बारे में हमें अनेक मान्यताएं सुनने को मिलती है, इस दिन के लिए अनेकों समुदायों का अपना-अपना अलग-अलग इतिहास विशेष भी रहा है परंतु सभी के दिलों में उन सभी विशेष पर्वों को मिलाकर एक ही आवाज निकलती है दीपावली!! यही हम भारतीयों की खूबसूरती रही है। चूंकि दीपावली पर्व में मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने की आस्था की मान्यता भी जुड़ी हुई है और हम सभी मां लक्ष्मी का पूजनकर हमें धन से संपन्न करने की प्रार्थना करते हैं कि हम हमेशा धन से हरे भरे रहें और यह उचित भी है क्योंकि बड़े बुजुर्ग कहते हैं भूखे भजन न होय गोपाला, याने धन की जरूरत मानवीय जीवन में अत्यंत जरूरी हिस्सा बन गया है, इसीलिए हम कहते हैं आओ मां लक्ष्मी को प्रसन्न करें। मेरे पिताजी जिन्हें समाज में उस्ताद भी कहते थे उन्होंने मुझे बताया था कि मां लक्ष्मी हर मनुष्य के जीवन में अपने अस्त्र याने धन के उपयोग के माध्यम से परीक्षा लेती है जो उनकी परीक्षा में पास हो गया तो मां कहती है मैं इस आंगन में ही रहूंगी जो फेल हो जाते हैं वह वहां से मां लक्ष्मी का धीरे-धीरे प्रस्थान  हो जाता है और हम सब जानते ही हैं कि बिना मां लक्ष्मी के जीवन कैसे व्यतीत होता है, इसलिए आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे कि आओ मां लक्ष्मी को प्रसन्न करें। 

साथियों बात अगर हम मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने की करें तो मेरी माता और पिता ने मुझे मेरे जीवन के यह अनमोल एक सीख दी थी कि, बेटा दीपावली खुशियों की बौछार जरूर लाती है हम नए नए कपड़े पहनते हैं मिठाइयां खाते और बांटते हैं, पटाखे जलाकर अति आनंद लेते हैं। मां लक्ष्मी की पूजा हर व्यक्ति परिवार समाज अपने-अपने तरीकों से करते हैं कोई आरती घुमा कर, कोई बैंड भी बुलाते हैं कोई दूध चांदी सोने के सिक्के से पूजा करते हैं इत्यादि अनेक तरीकों से पूजा होती है। परंतु असल बात तो यह है कि मां लक्ष्मी दैनिक मनीषी जीवन में यह देखती है कि मेरे अस्त्र यानें धन का उपयोग यह जीव कैसे करता है। मेरे माता पिता ने बताया मां अपने अस्त्र के माध्यम से जीवो को अनेक प्रलोभों से विचलित कर परीक्षा लेती है, कि जीव भटके, परंतु जो भटका उसे मिलता है झटका!! ऐसे कि वहां से मां प्रस्थान कर जाती है परंतु जो मां के अस्त्र का सम्मान कर उसका मूल्यांकन समझता है, वहां मां कहती है मैं इसके आंगन में ही निवास करूंगी।

साथियों बात अगर हम परीक्षा में जीवो के भटकने की करें तो मेरे माता पिता ने बतायाथा अपने अस्त्र के बल पर जीवो में आए विकारों, जैसे मदिरा, असामाजिक कार्य, पाप, अपराध अन्यायकारी धोखाधड़ी में धन का अपव्यय इत्यादि अनेक विकारों पर जीव धन का दुरुपयोग करता है जो मां के अस्त्र का अपमान है। हमनेदेखे होंगे कि किसी का दस का नोट भी नीचे गिरता है तो उसे उठाकर अपनी आंखों परसमर्पित कर सम्मान करता है, इसीलिए ही मां अपने अस्त्र का अपमान होते देख बहुत मौके देकर भी जीव नहीं संभलता तो वहां से प्रस्थान कर जाती है। हालांकि इस तरह का मां को प्रसन्न करने का तरीका हमारे सभी बड़े बुजुर्ग जानते होंगे परंतु अब समय आ गया है कि हम युवाओं को मां का पूजन करके प्रसन्न करने के अतिरिक्त यह पक्ष बता कर मार्गदर्शन करना समय की मांग है। देखें तो इससे दो फायदे होंगे पहला तो मां की कृपा हमेशा बनी रहेगी और परिवार सहित जीव हरा भरा रहेगा। दूसरा, जीव हर तरह के विकारों से मुक्त होगा जिसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलेगा कि फिर सतयुग की वापसी और सोने की चिड़िया में भारत जल्द से परिलक्षित होगा। यह विशेष ध्यान देने योग्य बात है कि मैं अपने माता-पिता द्वारा दिए गए दिव्य ज्ञान को यहां शब्दों के रूप में हम सबके सामने रख रहा हूं यह उनके विचार मात्र हैं जिसकी प्रमाणित कोई गारंटी नहीं है। 

साथियों बात अगर हम मां लक्ष्मी देवी के अन्य स्वरूपों की मान्यता की करें तो, हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव, संपत्ति, यश और कीर्ति की देवी माना जाता है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी की कृपा के बिना जीवन में समृद्धि और संपन्नता संभव नहीं है। मां लक्ष्मी अपने भक्तों की अनेक रूप में मनोकामनाएं पूरी करती हैं, परन्तु धर्म ग्रंथों एवं पुराणों में मां लक्ष्मी के आठ स्वरूपों का वर्णन है, जिन्हें अष्ट लक्ष्मी कहा जाता है। मां के ये अष्ट लक्ष्मी स्वरूप अपने नाम और रूप के अनुसार भक्तों के दुख दूर करते हैं तथा सुख, समृद्धि प्रदान करते हैं। (1)-आदि लक्ष्मी श्रीमद्भागवत पुराण में आदि लक्ष्मी को मां लक्ष्मी का पहला स्वरूप कहा गया है। इन्हें मूल लक्ष्मी या महालक्ष्मी भी कहा गया है। मान्यता है कि आदि लक्ष्मी मां ने ही श्रृष्टि की उत्पत्ति की है तथा भगवान विष्णु के साथ जगत का संचालन करती हैं। आदि लक्ष्मी की साधना से भक्त को जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति होती है।(2)- धनलक्ष्मी  मां लक्ष्मी के दूसरे स्वरूप को धन लक्ष्मी कहा जाता है। इनके एक हाथ में धन से भरा कलश है तथा दूसरे हाथ में कमल का फूल है। धन लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं तथा कर्ज से मुक्ति मिलती है। पुराणों के अनुसार, मां लक्ष्मी ने ये रूप भगवान विष्णु को कुबेर के कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिया था।(3) – धान्य लक्ष्मी-धान्य लक्ष्मी मां का तीसरा रूप है, ये संसार में धान्य यानि अन्न या अनाज के रूप में वास करती हैं। धान्य लक्ष्मी को मां अन्नपूर्णा का ही एक रूप माना जाता है। इनको प्रसन्न करने के लिए कभी भी अनाज या खाने का अनादर नहीं करना चाहिए।(4) – गज लक्ष्मी – लक्ष्मी हाथी के ऊपर कमल के आसन पर विराजमान हैं। मां गज लक्ष्मी को कृषि और उर्वरता की देवी के रूप  में पूजा जाता है। इनकी आराधना से संतान की प्राप्ति होती है। राजा को समृद्धि प्रदान करने के कारण इन्हें राज लक्ष्मी भी कहा जाता है।(5) – संतान लक्ष्मी – संतान लक्ष्मी को स्कंदमाता के रूप में भी जाना जाता है। इनके चार हाथ हैं तथा अपनी गोद में कुमार स्कंद को बालक रूप में लेकर बैठी हुई हैं। माना जाता है कि संतान लक्ष्मी भक्तों की रक्षा अपनी संतान के रूप में करती हैं।(6)- वीर लक्ष्मी – मां लक्ष्मी का ये रूप भक्तों को वीरता, ओज और साहस प्रदान करता है। वीर लक्ष्मी मां युद्ध में विजय दिलाती हैं। अपने हाथों में तलवार और ढाल जैसे अस्त्र शस्त्र धारण करती हैं। (7)-जय लक्ष्मी माता लक्ष्मी के इस रूप को जय लक्ष्मी या विजय लक्ष्मी के नाम से भी जाना जाता है। मां के इस रूप की साधना से भक्तों की जीवन के हर क्षेत्र में जय विजय की प्राप्ति होती है। जय लक्ष्मी मां यश, कीर्ति तथा सम्मान प्रदान करती हैं। (8)- विद्या लक्ष्मी – मां के अष्ट लक्ष्मी स्वरूप का आठवां रूप विद्या लक्ष्मी है। ये ज्ञान, कला तथा कौशल प्रदान करती हैं। इनका रूप ब्रह्मचारिणी देवी के जैसा है। इनकी साधना से शिक्षा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि आओ मां लक्ष्मी को प्रसन्न करें। बड़े बुजुर्गों द्वारा युवाओं को मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के तरीकों पर मार्गदर्शन करना समय की मांग है। मां लक्ष्मी हर मनुष्य के जीवन में अपने अस्त्र के उपयोग के माध्यम से परीक्षा लेती है। धन का सदुपयोग कर मां को प्रसन्न करें। 

संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

Editor CP pandey

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