मिशन शक्ति का सन्देश पहुंच रहा है समाज के बीच : प्रोफेसर पूनम टंडन

परिसर से बाहर मिशन शक्ति की उपस्थिति, समाज से सीधा संवाद : प्रो. पूनम टंडन

” महिलाएं देश नहीं चला सकती !” नुक्कड़ नाटक का एक अंश प्रस्तुत किया

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार की योजना ‘मिशन शक्ति’ फेज-5 के अंतर्गत चलाए जा रहे जागरूकता अभियान में सोमवार को पहली बार विश्वविद्यालय परिसर के बाहर रचनात्मक जागरूकता अभियान चलाया। इस अभियान के अंतर्गत चन्द्रकांति रमावती महाविद्यालय की छात्राओं ने महिला सशक्तिकरण पर दो नुक्कड़ नाटकों की जेटी पॉइंट, नौका विहार पर प्रस्तुत किया।
नाटक के समापन पर छात्राओं, शिक्षकों व कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित नागरिक समाज को संबोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि मिशन शक्ति का विश्वविद्यालय परिसर से बाहर समाज के बीच में जाना एक अच्छी पहल है। यह समाज से सीधा रचनात्मक संवाद है। विश्वविद्यालय में चलने वाली शिक्षा का उद्देश्य यह भी है कि उसका प्रभाव समाज तक पहुंचे और समाज की बेहतरी का माध्यम बन सके। समाज में व्याप्त रूढ़ियां समाप्त हो सके।
उन्होंने कहा कि मिशन शक्ति के तहत लगातार होने वाले व्याख्यान और विभिन्न गतिविधियों का होना बेहद महत्वपूर्ण है। कहा जाता है कि अगर झूठ को भी कई बार कहा जाए तो वह सच का आभास देने लगता है। ऐसी स्थिति में जो सच है और स्वस्थ भी, उसे बारंबार क्यों न कहा जाए! स्त्री सशक्तिकरण की दिशा में जागरूकता अभियान के लक्ष्यों को हासिल करना निश्चय ही कठिन है किंतु असंभव नहीं। हम अपनी तत्परता से एक दिन यह लक्ष्य जरूर हासिल कर लेंगे। वैसे भी समाज में होने वाले परिवर्तनों को खुली आंखों से देख पाना मुश्किल है। यह प्रक्रिया बहुत धीरे-धीरे चलती है। इसमें वक्त लगता है।
उन्होंने कहा कि स्त्री और पुरुष में कोई प्रतिद्वंद्विता नहीं है। दोनों एक दूसरे के सहयोगी व पूरक है। एक दूसरे के विकास में दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। विकसित राष्ट्र के लक्ष्यों को हासिल करने में स्त्री पुरुष को समान अवसर और समान धरातल पर लाना होगा।
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से छात्राओं ने यह संदेश दिया कि हर क्षेत्र में स्त्रियां अपना परचम लहरा रही हैं। जरूरत है तो सिर्फ समान अवसर की। उन्हें उचित शिक्षा व परवरिश मिलने पर वह देश को चलाने में भी सक्षम हैं।
दूसरे नुक्कड़ नाटक के माध्यम से उन्होंने यह स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थान, कार्यस्थलों व सार्वजनिक यातायात माध्यमों में स्त्रियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के लिए उन्हें सख्त होने की जरूरत है। बिना संकोच के पुलिस को इसकी सूचना देने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर नागरिक समाज के अतिरिक्त मिशन शक्ति की नोडल अधिकारी प्रोफेसर विनीता पाठक, प्रोफेसर श्रीवर्धन पाठक, डा. आमोद राय, डॉ. आशीष शुक्ल, डॉ. गौरव सिंह, डॉ. मीतू सिंह, डॉक्टर फरोजा खान समेत चंद्रकांति रमावती महाविद्यालय की शिक्षिकाएं भी मौजूद रहीं।
नौका बिहार चौराहे पर कुलपति ने शिक्षकों और छात्राओं के साथ आम नागरिक की तरह चाय पीकर सांकेतिक संदेश दिया। इसका मूल उद्देश्य स्त्रियों के संदर्भ में बने स्टीरियोटाइप को तोड़ना रहा। रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए स्त्रियों को रूढ़ियों को पीछे छोड़ आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।

rkpNavneet Mishra

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