बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। पिछले एक सप्ताह से पड़ रही कड़ाके की ठंड ने दिहाड़ी मजदूरों की कमर तोड़ दी है। ठंड के चलते निर्माण कार्य, मरम्मत व अन्य खुले कार्य लगभग ठप हो गए हैं, जिससे मजदूर मंडियों में मायूसी छाई हुई है। हालात ऐसे हैं कि प्रतिदिन काम की आस में पहुंच रहे मजदूरों में से मात्र 25 से 30 प्रतिशत लोगों को ही काम मिल पा रहा है, जबकि शेष को घंटों इंतजार के बाद बैरंग लौटना पड़ रहा है।
बुधवार की सुबह शहर के रामपुर आईटीआई चौराहा, चित्तू पांडेय चौराहा, बहेरी, गुदरी बाजार दुर्गा मंदिर और कदम चौराहा स्थित मजदूर मंडियों का जायजा लिया गया। हर जगह मजदूर अलाव के सहारे ठंड से बचने की कोशिश करते नजर आए। गांवों से काम की तलाश में आए मजदूरों ने बताया कि ठंड के बावजूद घर बैठना संभव नहीं है, क्योंकि परिवार का भरण-पोषण दिहाड़ी पर ही निर्भर है। मजदूरों का कहना है कि ठेकेदार और मकान मालिक ठंड के कारण काम शुरू कराने से कतरा रहे हैं। कई स्थानों पर आधा दिन इंतजार करने के बाद भी कोई बुलाने नहीं आता। इससे रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मजदूरों ने प्रशासन से मांग की है कि ठंड के मौसम में उनके लिए अस्थायी रोजगार की व्यवस्था की जाए तथा मजदूर मंडियों में अलाव, गर्म पानी व अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। कुल मिलाकर कड़ाके की ठंड ने पहले से जूझ रहे दिहाड़ी मजदूरों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। यदि जल्द राहत के उपाय नहीं किए गए तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
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