चंदेल मायका, गोंड ससुराल—दुर्गावती हमारी ढाल

फोटो goo

रानी दुर्गावती के शौर्य, स्वाभिमान और मातृभूमि के लिए बलिदान को समर्पित वीर रस की कविता

हाँ, वह चंदेलों की बेटी थी, गोंडों की बनी थी बहू,
माटी की आन बचाने गई, रण की धधकती धू-धू।
जन्म मिला राजमहल में, पर मन था जन-जन का,
तलवार उठी, नाम हुआ भारत के स्वाभिमान का।
दलपत का साथ मिला, गढ़-मंडला का मान मिला,
शासन की कठिन राह में दुर्गावती को सम्मान मिला।
नन्हे वीर नारायण को माता ने भी ‘शौर्य’ सिखाया,
‘राज्य, धर्म और स्वाभिमान’ का पाठ उसे पढ़ाया।
यूं मुगलों की जब सेना आई, धरती काँप उठी थी,
पर दुर्गावती की आँखों में ज्वाला तब भी जगी थी।
तीर चले, तलवारें चमकीं, रण में गर्जी वीरांगना,
कम थे सैनिक, फिर भी उसने न झुकाया सर अपना।
शत्रु बड़ा था, सेना भारी, लेकिन हौसला भारी था,
‘मातृभूमि की रक्षा’ करना उसका पहला कर्तव्य था।
विजय-पराजय की बातें बाद में, पहले ‘राष्ट्र का मान’ था,
दुर्गावती के जीवन का बस यही महान विधान था।
चंदेल मायका गर्वित था और गोंड ससुराल निहाल,
वे दोनों कुल की शान बनीं, भारत की वीर मशाल।
आज भी जब इतिहास पुकारे, गूँजता उनका नाम,
रानी दुर्गावती ‘अमर’ रहें, अमर रहे उनका सम्मान!
✍️ रचनाकार
संजय एम. तराणेकर

कवि, लेखक एवं समीक्षक
इन्दौर–452011, मध्य प्रदेश

Editor CP pandey

Recent Posts

विश्व बैंक की आर्थिक रिपोर्ट, चुनाव आयोग पर विपक्ष का मार्च और सुप्रीम कोर्ट का संवैधानिक संदेश

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र) गोंदिया। 21वीं सदी के वैश्विक परिदृश्य में 6 अक्टूबर…

42 minutes ago

जिला स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता में देवरिया ग्रामीण का दबदबा

बालिका अंडर-19, अंडर-17 और अंडर-14 में हासिल किया प्रथम स्थान भागलपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। भरोसा…

10 hours ago

गौ सेवा के साथ युवाओं ने दिया सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की ओर से…

10 hours ago

1 नवंबर को मेगा विधिक सेवा शिविर, पात्र लाभार्थियों को मिलेगा योजनाओं का लाभ

विभागीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए लगाए जाएंगे स्टॉल, लाभार्थियों का किया जा रहा चिन्हांकन…

10 hours ago