Categories: Uncategorized

टैरिफ बनाम ट्रेड बजूका: क्या वैश्विक व्यापार युद्ध की ओर बढ़ रही दुनिया?

ग्रीनलैंड पर अमेरिका–फ्रांस टकराव: उपहास, टैरिफ धमकियां और EU का ‘ट्रेड बजूका’ आमने-सामने


वाशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)अमेरिका और फ्रांस के बीच ग्रीनलैंड को लेकर कूटनीतिक टकराव अब तीखे उपहास, आर्थिक चेतावनियों और व्यापारिक दबाव तक पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की महत्वाकांक्षा ने यूरोप में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। वाशिंगटन इसे सुरक्षा के नजरिये से देख रहा है, जबकि पेरिस और यूरोपीय संघ इसे संप्रभुता पर सीधा हमला मान रहे हैं।
अमेरिका की ओर से ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने ट्रंप के रुख का बचाव करते हुए तर्क दिया कि आर्कटिक क्षेत्र में भविष्य में रूस से खतरा बढ़ सकता है। उनके अनुसार, यदि रूस ग्रीनलैंड पर हमला करता है तो अमेरिका को युद्ध में उतरना पड़ेगा, इसलिए “शांति बनाए रखने” के लिए अभी ही ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लाना बेहतर होगा। इस दलील ने यूरोप में नाराजगी और उपहास दोनों को जन्म दिया।

ये भी पढ़ें – तेज रफ्तार बन रही जान की दुश्मन, युवाओं में बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं चिंता का विषय

फ्रांस के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक अकाउंट से सोशल मीडिया पर इस तर्क का मज़ाक उड़ाया गया। तुलना करते हुए लिखा गया कि अगर कभी आग लग सकती है तो अभी घर जला देना चाहिए, या अगर शार्क हमला कर सकती है तो अभी लाइफगार्ड को खा लेना चाहिए। इस व्यंग्य ने कूटनीतिक भाषा की सीमाएं तोड़ दीं और विवाद को सार्वजनिक बहस में बदल दिया।
आर्थिक मोर्चे पर भी तनाव तेज हो गया है। फ्रांस के वित्त मंत्री रोलैंड लेस्क्योर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह का दबाव EU और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने दोहराया कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का संप्रभु हिस्सा है और यूरोपीय संघ से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसके साथ छेड़छाड़ अस्वीकार्य है। यही संदेश अमेरिकी समकक्षों तक भी पहुंचाया गया है।
इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने डेनमार्क और फ्रांस समेत कई यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जो 1 फरवरी 2026 से लागू होगा। चेतावनी दी गई है कि यदि ग्रीनलैंड पर समझौता नहीं हुआ तो 1 जून से यह टैरिफ 25% तक बढ़ाया जा सकता है।
यूरोपीय संघ ने भी पलटवार के संकेत दे दिए हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आपात बैठक के बाद ‘एंटी-कोअर्सन इंस्ट्रूमेंट’ (ACI) यानी EU के ‘ट्रेड बजूका’ का जिक्र किया। यह उपकरण उन देशों के खिलाफ आर्थिक जवाबी कार्रवाई के लिए बनाया गया है जो व्यापार को दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं। साफ है कि ग्रीनलैंड का मुद्दा अब सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और शक्ति संतुलन की परीक्षा बन चुका है।

Editor CP pandey

Recent Posts

यात्रियों की सुरक्षा के लिए देवरिया स्टेशन पर चला विशेष चेकिंग अभियान

देवरिया रेलवे स्टेशन पर चला सघन सुरक्षा अभियान, डॉग स्क्वाड व बम निरोधक दस्ते ने…

13 hours ago

घर में घुसे जहरीले कोबरा ने ली मासूम की जान, 10 वर्षीय सपना की मौत से गांव में मातम

निचलौल रेफर के बाद जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में तोड़ा दम, रेस्क्यू टीम…

17 hours ago

बीबीएयू में राष्ट्रीय मीडिया कार्यशाला, जिम्मेदार पत्रकारिता और फैक्ट-चेकिंग पर दिया गया जोर

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में शनिवार को जनसंचार एवं पत्रकारिता…

1 day ago

भूगोल की पढ़ाई के खुले नए रास्ते, अब किसी भी संकाय के छात्र ले सकेंगे प्रवेश

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की विद्या परिषद ने भूगोल विषय की…

2 days ago

भाजपा नेताओं ने कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का किया भव्य स्वागत

बभनान/बस्ती(राष्ट्र की परम्परा)उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भाजपा सूर्य प्रताप…

2 days ago

विज्ञान और कहानी के संगम से निखरी बच्चों की प्रतिभा, ‘एससीआई-टेल्स 2026’ का भव्य आयोजन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर द्वारा आयोजित 'एससीआई-टेल्स 2026 (साइंस, क्रिएटिविटी एंड…

2 days ago