टैरिफ का असर: अमेरिका को भारत का निर्यात सितंबर में 12% घटा, चीन को निर्यात में 34% की बढ़त

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर ऊँचा आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने के असर से सितंबर 2025 में भारत का अमेरिका को निर्यात 11.93% घटकर 5.46 अरब डॉलर रह गया। वहीं, इसी अवधि में अमेरिका से आयात 11.78% बढ़कर 3.98 अरब डॉलर दर्ज किया गया है।

वाणिज्य मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2025 के दौरान भारत का अमेरिका को कुल निर्यात 13.37% बढ़कर 45.82 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 9% बढ़कर 25.6 अरब डॉलर तक पहुँच गया।

सितंबर में रिकॉर्ड मासिक गिरावट

थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, सितंबर 2025 में अमेरिका को निर्यात अगस्त की तुलना में 17.9% घटा, जो इस साल की सबसे बड़ी मासिक गिरावट है।
GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने बताया कि मई से सितंबर के बीच भारत का अमेरिका को निर्यात करीब 37.5% घट चुका है, जिससे 3.3 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ है।

उन्होंने बताया कि टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद और रासायनिक क्षेत्र पर सबसे अधिक असर देखा गया है।
गौरतलब है कि अमेरिका ने 27 अगस्त से भारतीय उत्पादों पर 50% तक का टैरिफ लागू किया है।

चीन को निर्यात में 34% की बढ़त

भारत से चीन को निर्यात सितंबर में 34.18% बढ़कर 1.46 अरब डॉलर हो गया। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में चीन को निर्यात 21.96% बढ़कर 8.41 अरब डॉलर, जबकि चीन से आयात 11.25% बढ़कर 62.88 अरब डॉलर दर्ज किया गया।
इसके अलावा, यूएई, ब्रिटेन, जर्मनी, सऊदी अरब, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, ब्राजील और इटली को निर्यात में भी वृद्धि देखी गई है, जबकि नीदरलैंड, सिंगापुर और फ्रांस को निर्यात में गिरावट दर्ज की गई।

स्विट्जरलैंड बना भारत का नया आर्थिक साझेदार

अमेरिकी टैरिफ के बीच स्विट्जरलैंड ने भारत को अपना प्राथमिक आर्थिक साझेदार घोषित किया है।
स्विट्जरलैंड की हेड ऑफ प्रमोशन एक्टिविटीज डाइरेक्टोरेट (SECO), मार्टिन सालाडिन ने कहा —

“अमेरिकी ऊँचे टैरिफ हमारे लिए चुनौती हैं, लेकिन भारत हमारे विविधीकरण रणनीति का प्रमुख हिस्सा है।”

स्विट्जरलैंड ने रेलवे, रोपवे, और सुरंग निर्माण तकनीक जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ निवेश बढ़ाने की योजना बनाई है।
दोनों देशों के बीच EFTA–भारत मुक्त व्यापार समझौता (TEPA) लागू किया जा चुका है, जो निवेश सहयोग को नई दिशा देगा।

Karan Pandey

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