राधिका का इंतजार :एक कहानी
राधिका हर शाम, सूरज ढलने से ठीक पहले, अपने घर के बरामदे में आ बैठती थी। उसकी नज़रें दूर गाँव के कच्चे रास्ते पर टिकी रहतीं थी जहाँ से गोपाल…
राधिका हर शाम, सूरज ढलने से ठीक पहले, अपने घर के बरामदे में आ बैठती थी। उसकी नज़रें दूर गाँव के कच्चे रास्ते पर टिकी रहतीं थी जहाँ से गोपाल…