कपास जैसा प्रेम: त्याग, निष्ठा और साथ निभाने का आदर्श
✍️ नवनीत मिश्र “प्रीत करो तो ऐसी करो जैसी करे कपास।जीते जी तन ढके, मरे न छोड़े साथ॥” यह दोहा संत परंपरा के अमर कवि कबीर की वाणी का सार…
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✍️ नवनीत मिश्र “प्रीत करो तो ऐसी करो जैसी करे कपास।जीते जी तन ढके, मरे न छोड़े साथ॥” यह दोहा संत परंपरा के अमर कवि कबीर की वाणी का सार…