लोकतंत्र

मतदाता जागरूकता के लिए एनएसएस रैली, सेवा और लोकतंत्र पर हुआ विचार-विमर्श

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल इंटर कॉलेज महराजगंज की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा नेहरू नगर पिपरदेउरा में आयोजित…

3 hours ago

मतदान से ही सशक्त होगा लोकतंत्र: प्रो. पूनम टंडन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय सेवा योजना, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर द्वारा राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर जागरूकता…

2 weeks ago

किसान से संविधान तक: भारत के राष्ट्र-निर्माण पर सांप्रदायिक हिंसा की छाया

भारत का राष्ट्र-निर्माण विमर्श बनाम सामाजिक यथार्थ:- किसान,सांप्रदायिक हिंसा और लोकतांत्रिक परीक्षा भूमिका:- एक समग्र विश्लेषण गोंदिया - 14 जनवरी…

3 weeks ago

पश्चिम बंगाल से उठता सवाल: क्या सत्ता कानून से ऊपर हो सकती है?

नवनीत मिश्र पश्चिम बंगाल की घटना केवल एक क्षणिक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं और संस्थागत संतुलन पर गहराते…

4 weeks ago

अदालत के आदेश पर बुलडोजर, जवाब में पत्थर-यह विरोध नहीं, खुली बगावत है

तुर्कमान गेट की घटना कोई अचानक उभरा गुस्सा नहीं, बल्कि कानून और संविधान को ठेंगा दिखाने की सोची-समझी मानसिकता का…

4 weeks ago

लोकतंत्र के साहसी प्रहरी राज नारायण: सत्ता के सामने सत्य और साहस के प्रतीक

पुनीत मिश्र राज नारायण भारतीय राजनीति के उन विरले नेताओं में थे, जिनके लिए सत्ता साध्य नहीं, बल्कि जनता की…

1 month ago

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर लगातार हमले: लोकतंत्र और मानवाधिकारों की अग्निपरीक्षा

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय पर हो रहे लगातार हमले केवल एक देश की आंतरिक समस्या नहीं हैं, बल्कि यह…

1 month ago

मतदान से लोकतंत्र सशक्त, उदासीनता से कमजोर होती जनशक्ति

लेखक - कैलाश सिंह महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। लोकतंत्र में मतदान केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि वह सबसे सशक्त…

1 month ago

भावनाओं, संघर्ष और परिवर्तन की गूंज: 16 दिसंबर का इतिहास जो मानवता को झकझोर देता है

इतिहास केवल बीती तारीखों का संकलन नहीं होता, बल्कि वह मानव सभ्यता की चेतना, संघर्ष, उपलब्धियों और त्रासदियों का जीवंत…

2 months ago

संविलियन विद्यालय गढ़िया रंगीन में मतदाता सूची का गहन सत्यापन, ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)। गढ़िया रंगीन कस्बे में स्थित संविलियन विद्यालय में उपजिलाधिकारी कलान की अध्यक्षता में ग्रामवासियों के साथ…

2 months ago

भारत के लोकतंत्र में पुराने चेहरों का दबदबा क्यों? क्या नए नेतृत्व को नहीं मिलना चाहिए समान अवसर?

लेखक: चंद्रकांत सी. पूजारी, गुजरात भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, लेकिन यहाँ बार-बार एक ही चेहरों और पुराने…

2 months ago