मुशायरे में बही संवेदना और व्यंग्य की धारा बजती रही

कवि सम्मेलन व मुशायरे में बही संवेदना और व्यंग्य की धारा बजती रही तालियां

विभिन्न शहरों से आए कवियों ने शब्दों से बांधा समां, अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर हुआ सम्मान गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l…

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