त्योहार और दिखावा

व्यंग्य: चाँद फिर निकला है, खीर देख मन पिघला है!

लेखक: संजय एम. तराणेकर, कवि, लेखक एवं समीक्षक, इंदौर (मध्य प्रदेश) शरद पूर्णिमा की रात है। चाँद अपनी सोलह कलाओं…

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