बेसहारा ज़िंदगी का वालिद कौन? समाज, परिवार और व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आज समाज के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा है, जो जितना संवेदनशील है उतना ही शर्मनाक भी—बेसहारा ज़िंदगी का वालिद कौन? सड़कों पर भटकते बच्चे, वृद्धाश्रमों…
