भारतीय ज्ञान परम्परा के समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य को समझेंगे विद्यार्थी

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा विद्यार्थियों के लिए नए सत्र से भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) आधारित पाठ्यक्रम ‘भारतीय ज्ञान परम्परा का समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य’ का संचालन किया जा रहा है। पाठ्यक्रम से विद्यार्थी भारतीय पारंपरिक ज्ञान की मूल बातों को समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से समझेंगे। भारतीय समाज में पश्चिमी औपनिवेशिक हस्तक्षेप के कारण सामाजिक विषयों एवं सामाजिक स्वरुप में उत्पन्न विभाजन को दूर करने के लिए अपने पारंपरिक ज्ञान विमर्श को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्रीय से वैश्विक स्तर तक भारतीय समाजशास्त्र के विकास में योगदान देने के लिए एक प्रभावी आधार प्रदान करना है।
चार वर्षीय स्नातक समाजशास्त्र के सातवें सेमेस्टर में संचालित होने वाला यह पाठ्यक्रम भारतीय ज्ञान परंपराओं के मानवीय मूल्य, पर्यावरण संरक्षण, समग्र विकास जैसी अवधारणाओं पर केंद्रित होने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों एवं वनवासी समुदायों की ज्ञान परंपरा का विश्लेषण करने में सहायक होगा। पाठ्यक्रम के अंतर्गत एकात्म मानववाद, वैदिक नारीवाद, पंचकोश का सिद्धांत, अंत्योदय, पारंपरिक ज्ञान आधारित समाजशास्त्रीय संकल्पनाओ को शामिल किया गया है। साथ ही पाठ्यक्रम में विशेष रूप से राम राज्य की अवधारणा एवं उसके समाजशास्त्रीय मूल्यांकन पर भी विमर्श शामिल किया गया है।
पारंपरिक भारतीय ज्ञान की अवधारणा और इसकी प्रासंगिकता को समझने के लिए कर्म का सिद्धांत, आश्रम प्रणाली, पुरुषार्थ तथा भारतीय परंपरा में मनुष्य जैसी बुनियादी अवधारणाओं को शामिल किया गया है। इसमें वेद, पुराण और उपनिषद् के साथ ही स्थानीय ज्ञान के अन्य स्रोतों में उल्लिखित सिद्धांतों पर चर्चा की जाएगी।
विभागाध्यक्ष प्रो. अनुराग द्विवेदी ने बताया कि भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित यह पाठ्यक्रम उत्तर प्रदेश में पहली बार समाजशास्त्र विषय में शामिल किया गया है। पाठ्यक्रम समाजशास्त्रियों, शिक्षकों तथा विद्यार्थियों को भारतीय समाजशास्त्र पाठ्य-सामग्री, विषय-वस्तु और शिक्षण-शास्त्र के प्रति संवेदनशील बनाएगा। इसके माध्यम से समाज से सम्बन्धित प्राचीन भारतीय ज्ञान को समाजशात्रीय सिद्धांत के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
स्नातक समाजशास्त्र के आठवें सेमेस्टर में विद्यार्थी पढ़ेंगे ‘कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी’
विद्यार्थियों के कौशल संवर्धन के लिए स्नातक समाजशास्त्र अंतिम वर्ष अंतिम सेमेस्टर (आठवें सेमेस्टर) में ‘कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर)’ का पाठ्यक्रम शामिल किया गया है। सामाजिक रूप से जिम्मेदार कॉर्पोरेट्स के रूप में आगे बढ़ने के साथ पाठ्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थी सीएसआर गतिविधियों की योजना बनाना और उन्हें लागू करना सीखेंगे। साथ ही छात्रों को नागरिक समाज की भूमिका और सतत विकास लक्ष्य का विश्लेषण करने में मदद मिलेगी। समय की माँग के अनुरूप सीएसआर के सम्बन्ध में विद्यार्थियों को दक्ष किया जाएगा।
इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अन्तर्गत भारतीय ज्ञान परम्परा के अध्ययन-अध्यापन पर विशेष बल प्रदान किया गया है। एनईपी भारत के सनातन ज्ञान एवं विचारों के समृद्ध आलोक में निर्मित की गयी है। इस दिशा में पहल करते हुए नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परम्परा के समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से परिचित कराने का प्रयास किया गया है। विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परम्परा से सम्बन्धित संप्रत्ययों जोड़ने और उनके अध्ययन द्वारा निश्चित रूप से नयी पीढ़ी के विद्यार्थियों में भारतीय होने का गौरवबोध जागृत होगा।

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