सुरक्षित गर्भ समापन के बाद परिवार नियोजन का कोई न कोई साधन आवश्यक

जिले में 33 निजी अस्पतालों को है सुरक्षित गर्भ समापन की अनुमति

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)।
सुरक्षित गर्भ समापन केवल अधिकृत अस्पताल में प्रशिक्षित चिकित्सक से ही करवाना चाहिए और उसके बाद परिवार नियोजन का कोई न कोई साधन अवश्य चुनना चाहिए । ऐसा न करने से दोबारा गर्भधारण की आशंका प्रबल होती है और यह स्थिति मां की सेहत के लिए खतरनाक होती है । मातृ मृत्यु दर को कम करने में सुरक्षित गर्भ समापन की अहम भूमिका होती है और यह महिला का विधिक अधिकार भी है । यह जानकारी सुरक्षित गर्भ समापन सेवा के नोडल अधिकारी, डॉ अनिल कुमार सिंह ने दी । उन्होंने बताया कि जिले में 33 निजी अस्पतालों को ही सुरक्षित गर्भ समापन की अनुमति है। जिला महिला अस्पताल, प्रथम संदर्भन इकाइयों और उन सभी सरकारी अस्पतालों पर सुरक्षित गर्भ समापन की सुविधा उपलब्ध है जहां प्रशिक्षित चिकित्सक हैं ।
नोडल अधिकारी ने बताया कि देश में आठ फीसदी माताओं की मौत, केवल असुरक्षित गर्भ समापन के कारण हो जाती है। जानकारी के अभाव में और कई अन्य कारणों से भी महिलाएं या उनके अभिभावक अप्रशिक्षित व्यक्ति से गर्भ समापन का प्रयास करते हैं, जो उनके जीवन के लिए हानीकारक साबित होता है। गर्भ समापन सिर्फ प्रशिक्षित चिकित्सक ही करते हैं। किसी भी अन्य स्वास्थ्य कर्मी, स्टॉफ नर्स या पैरामेडिकल को यह करने का अधिकार नहीं है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से अनुमति के बाद ही कोई निजी अस्पताल यह करने के लिए अधिकृत है। प्रशिक्षित चिकित्सक की उपलब्धता वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी 12 सप्ताह तक, की प्रेग्नेंसी की स्थित में सुरक्षित गर्भ समापन की सेवा दे सकते हैं।
डॉ सिंह ने बताया कि, इस कार्यक्रम को मजबूती प्रदान करने के लिए आईपास संस्था के प्रतिनिधि श्वेतांशु समय-समय पर प्रशिक्षण देते हैं। इस बारे में हाल ही में जिला अस्पताल के चिकित्सक, स्टाफ और वहां की प्रशिक्षु सीएचओ का संवेदीकरण भी किया गया। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 में हुए संशोधन के बाद, अब विशेष परिस्थितियों में 20 सप्ताह की बजाय 24 के भीतर तक सुरक्षित गर्भ समापन की अनुमति है । 24 सप्ताह से ज्यादा की स्थिति में मेडिकल बोर्ड की अनुमति आवश्यक है। गर्भ समापन के पहले 18 वर्ष से अधिक उम्र की महिला की खुद की सहमति, जबकि इससे कम उम्र की स्थिति में संरक्षक की सहमति फार्म पर अनिवार्य है। लिंग भेद के आधार पर गर्भ समापन अवैध है और ऐसा करना दंडनीय अपराध भी है।

RKP News गोविन्द मौर्य

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