गोरखपुर में “विशाल भारत का भूगोल” विषय पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन, 300 से अधिक शोध प्रस्तुत

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। महायोगी गुरु श्री गोरखनाथ शोध पीठ, गोरखपुर में आयोजित “विशाल भारत का भूगोल” विषयक दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती और महायोगी गुरु गोरक्षनाथ के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई, जिसके बाद अतिथियों का स्वागत किया गया।

सेमिनार के निदेशक प्रो. एस. के. सिंह ने स्वागत भाषण में संगोष्ठी के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली के परिप्रेक्ष्य में भारत की भौगोलिक अवधारणा को समझना और उसका बहुआयामी अध्ययन करना बेहद आवश्यक है।

आयोजन सचिव डॉ. मनीष कुमार सिंह ने सेमिनार प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय ज्ञान प्रणाली के आलोक में विशाल भारत की भौगोलिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अवधारणा का पुनर्परिचिंतन करना था। उन्होंने बताया कि संगोष्ठी में 332 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें लगभग 41 प्रतिशत महिलाएं शामिल रहीं। प्रतिभागी 218 से अधिक संस्थानों और 12 से अधिक विषयों से जुड़े थे तथा इस दौरान लगभग 285 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।

संगोष्ठी के दौरान कुल आठ तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 300 से अधिक ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रस्तुतियां दी गईं। अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं के रूप में डॉ. कुमार कृष्ण (नासा, अमेरिका), डॉ. अनुपम सिंह (यूके) और प्रो. आलोक तिवारी (सऊदी अरब) ने ऑनलाइन माध्यम से अपने विचार साझा किए।

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समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. पृथ्वीस नाग, निदेशक एनएटीएमओ ने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं बल्कि एक विचार और प्रयोग है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक भारत और आध्यात्मिक भारत के संबंधों को समझना बेहद महत्वपूर्ण है। विशाल भारत की अवधारणा को समझने के लिए मध्य एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, चीन और निकोबार द्वीपों के साथ भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का अध्ययन भी जरूरी है।

विशिष्ट अतिथि प्रो. वी. सी. झा, पूर्व निदेशक एनएटीएमओ ने कहा कि भारत की भौगोलिक अवधारणा को समझने के लिए ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भों को ध्यान में रखना आवश्यक है। वहीं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. ए. आर. सिद्दीकी ने कहा कि भारत की स्थलाकृति, भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक विविधता अद्वितीय है तथा भारतीय ज्ञान प्रणाली को वैश्विक ज्ञान प्रणालियों के साथ जोड़ने की जरूरत है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि भूगोल का अध्ययन हमें पर्यावरण, संसाधनों और समाज के प्रति जागरूक बनाता है और हमें अपने ज्ञान का उपयोग समाज के हित में करना चाहिए।

इस अवसर पर दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. शांतनु रास्तोगी भी उपस्थित रहे। उन्होंने संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए आयोजकों और भूगोल विभाग को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे अकादमिक आयोजन नई बौद्धिक संभावनाओं को जन्म देते हैं और भारतीय ज्ञान परंपरा को मजबूत करते हैं।

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संगोष्ठी के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति का पुरस्कार दिव्या मिश्रा और उनकी टीम को तथा द्वितीय स्थान प्रियंका मिश्रा और उनकी टीम को मिला। वहीं सर्वश्रेष्ठ मॉडल प्रस्तुति का पुरस्कार अंकित दुबे और उनकी टीम को प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. स्वर्णिमा सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जबकि संचालन डॉ. श्रीप्रकाश सिंह ने किया।

Karan Pandey

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