समाचार में सादगी को बचाने की आवश्यकता है: आशुतोष शुक्ल

मीडिया कार्यशाला का दूसरा दिन

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। रेडियो जयघोष संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश और जिम्सी कानपुर की ओर से 27 जून से 2 जुलाई तक उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी में आयोजित मीडिया कार्यशाला के दूसरे दिन बुधवार को एक दैनिक समाचार पत्र के उत्तर प्रदेश संपादक आशुतोष शुक्ल ने कहा कि पत्रकारिता ही नहीं एंकरिंग तक में भाषा परिपक्वता और जवाबदेही जरूरी है।
उन्होंने अहम् मशविरा दिया कि टीवी परिचर्चाओं में अपने विचारों को झगड़ कर नहीं मतभेद को तर्क और शाइस्तगी के साथ रखना चाहिए। उन्होंने शुद्ध समाचार पर जोर देते हुए कहा कि समाचार को बिना लाग लपेट के प्रस्तुत किया जाए। सबसे जरूरी है सादगी जो अमूमन वर्तमान में लुप्त होती जा रही है।
कार्यशाला में आशुतोष शुक्ल ने आगे बताया कि हर शब्द का अपना कलेवर होता है। इसलिए शब्द चयन पर पत्रकार को खास ध्यान देना चाहिए। दूसरी ओर उन्होंने रेडियो पत्रकारिता के लिए भी मशविरा दिया कि यह क्षेत्र भी पर्याप्त रियाज मांगता है जिसकी शुरुआत घर से ही की जा सकती है।
उन्होंने कहा अगर पत्रकार विनम्र नहीं है तो वह सफलता की सीढ़ियां नहीं चढ़ सकता है। उन्होंने पत्रकारिता मे सफलता का मंत्र दिया कि हर पत्रकार को चाहिए कि वह जिज्ञासु हो। वह अपने परिवेश के प्रति संवेदनशील हो। इसके साथ ही उसमें घुमक्कड़ी का हुनर जरूर हो। उसकी भाषा शैली सहज और परिपक्व हो। अंतिम गुण उन्होंने बताया कि पत्रकार में क्रोध भी होना चाहिए। यह क्रोध ही उसे सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने सरकार का आवाह्न करते हुए कहा कि जिलेवार अभियान चलाने की आवश्यकता है जिससे विचारो का परिष्कार किया जा सके। उस अभियान से ही हृदय भी निर्मल होगा।
आमंत्रित विशेषज्ञ दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ.रवि सूर्यवंशी ने बताया कि आधुनिक दौर में टीवी और डिजिटल मीडिया एक दूसरे के पूरक हो गए हैं। ऐसे में वैश्विक स्तर पर सूचनाओं के प्रसारण को देखते हुए टीवी पत्रकारिता की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
लखनऊ विश्वविद्यालय पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रो.मुकुल श्रीवास्तव ने सूचना की सत्यता को सर्वाधिक महत्व देने की बात प्रमुखता के साथ रखी। उन्होंने कहा कि हर पत्रकार को डिजिटल क्रान्ति युग में टैक्नोसेवी होना चाहिए। उनके अनुसार वर्तमान में रिवर्स इमेज सर्च का प्रयोग करके, किसी भी चित्र के मूल सोर्स तक पहुंचा जा सकता है। हमेशा प्रकाशित करने से पहले तस्वीर की सत्यता की जांच कर ली जानी चाहिए।
आईएफएस और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट हर्विंदर सोहल ने बताया कि वन अधिकार अधिनियम का मुख्य उद्देश्य वन में रहने वाले समुदायों और आदिवासी आबादी के अधिकारों को संरक्षित करना है। उन्होंने वन पत्रकारिता के संदर्भ में लोगों को जागरुक करते हुए भारतीय संविधान में मिली सुविधाओं और निषेधों की जानकारियां दी।
सुबह 8 से 11 बजे तक संचालित इस कार्यशाला के दूसरे दिन जिम्सी कानपुर के निदेशक डॉ.उपेन्द्र, जिम्सी कानपुर के असिस्टेंट प्रो.रामकृष्ण बाजपेई, आरजे राधेश्याम दीक्षित, आरजे समरीन, रेडियो जयघोष के समन्वयक डॉ.दुर्गेश पाठक सहित अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे।

rkpNavneet Mishra

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