अधूरी चिट्ठी

गाँव के पुराने बरगद के पेड़ के नीचे एक टूटी-फूटी लकड़ी की चारपाई पड़ी रहती थी। उसी पर रामनाथ बैठा रहता था।उसकी उम्र लगभग लगभग सत्तर बरस थी। चेहरे पर झुर्रियां भरी हुई थी, बाल सफेद और रंग गेहुंआ था।आखों के नीचे काले घेरे थे,पर आँखों में एक अजीब सी चमक—जैसे किसी का इंतज़ार हो।
एक लम्बा इंतजार
हर दिन की तरह आज भी उसने अपनी पुरानी थैली खोली, उसमें से एक पीली पड़ चुकी चिट्ठी निकाली और उसे बार-बार पढ़ने लगा। यह चिट्ठी उसकी पत्नी सुशीला की थी, जो बरसों पहले शहर नौकरी करने गए बेटे को भेजी थी।
पर बेटे ने कभी उस चिट्ठी का जवाब नहीं दिया।
रामनाथ के होंठ काँपे—
“कितनी बार लिखी उसने, कि तेरे बिना घर सूना लगता है। तेरी माँ तेरी राह देख रही है। तू बस एक बार गाँव लौट आ…”
चिट्ठी पढ़ते-पढ़ते उसकी आँखें भीग जातीं। सुशीला अब इस दुनिया में नहीं थी। उसका देहांत पाँच बरस पहले हो चुका था। जाते-जाते भी उसने रामनाथ से कहा था—
“अगर बेटा लौटे, तो कहना कि माँ आख़िरी दम तक उसका इंतज़ार करती रही।”
लेकिन बेटा आज तक न आया।
गाँव के लोग अकसर रामनाथ से कहते,
“अब भूल जाओ बाबूजी, शहर में लोग व्यस्त रहते हैं, कौन लौटकर आता है गाँव?”
पर रामनाथ हर शाम बरगद के नीचे बैठकर बेटे की राह देखता।
बरसात आई, जाड़ा आया, गर्मियाँ भी गुज़रीं, मगर उसका इंतज़ार वही रहा।
एक दिन डाकिया गाँव में आया। बूढ़े रामनाथ ने दौड़ते हुए पूछा,
“भाई, मेरे नाम कुछ आया है क्या?”
डाकिया ने मुस्कुराते हुए कहा,
“नहीं बाबूजी, अब तो सब मोबाइल से बात करते हैं, चिट्ठी कौन लिखता है!”सारे लोग मोबाइल से ही बात किया करते है।
रामनाथ का दिल और टूट गया। उसने धीरे से उस पुरानी चिट्ठी को अपनी छाती से लगा लिया, जैसे वही उसकी आख़िरी आस हो।
कई साल बीते। एक दिन गाँव में खबर आई कि शहर से एक आदमी आया है, बड़ी कार में। वह सीधा बरगद के पेड़ के पास पहुँचा। वह रामनाथ का बेटा था।
पर अफ़सोस—वह तब आया, जब चारपाई पर पड़ी ठंडी देह को लोग कंधों पर उठाकर श्मशान ले जा रहे थे।
रामनाथ की झुर्रियों से भरे चेहरे पर अब भी वही चिट्ठी रखी थी, जिसे उसने मरते दम तक सीने से लगाया हुआ था।
बेटे ने पहली बार वह चिट्ठी पढ़ी और फूट-फूटकर रो पड़ा।
रिश्तों को संभालने के लिए वक्त कभी भी सही या ग़लत नहीं होता, बस देर नहीं करनी चाहिए। क्योंकि खो जाने के बाद पछतावे के आँसू भी किसी को लौटा नहीं पाते।

सुनीता कुमारी
पूर्णिया बिहार

rkpnews@desk

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