नंदीग्राम उपचुनाव का चौंकाने वाला परिणाम: हसीन रानी रथ की प्रचंड जीत, कांग्रेस को करारी शिकस्त

हसीन रानी रथ ने कांग्रेस प्रत्याशी को 1.22 लाख वोटों से हराया, सियासी गलियारों में मची हलचल

नंदीग्राम, पश्चिम बंगाल (राष्ट्र की परम्परा)। पश्चिम बंगाल की राजनीति में नंदीग्राम उपचुनाव के नतीजे ने सबका ध्यान खींचा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उम्मीदवार हसीन रानी रथ ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को भारी मतों के अंतर से पराजित कर बड़ी जीत दर्ज की। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, हसीन रानी रथ को कुल 1,64,427 वोट मिले, जबकि मिलन प्रधान के खाते में 41,674 वोट आए। इस तरह BJP उम्मीदवार ने 1,22,753 मतों के विशाल अंतर से जीत हासिल की। यह अंतर कुल पड़े मतों के लगभग 75 प्रतिशत के बराबर बताया गया है।

हसीन रानी रथ का नाम पश्चिम बंगाल की सियासत में इसलिए भी चर्चा में रहा, क्योंकि वह मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के पूर्व सहयोगी चंद्रनाथ रथ की मां हैं। नंदीग्राम का राजनीतिक महत्व पहले से ही काफी अधिक रहा है। ऐसे में उपचुनाव में BJP की इस जीत को राज्य की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

इस चुनाव में BJP और विपक्षी INDIA गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला। तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन दिया था। बताया गया कि तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने सुवेंदु अधिकारी के साथ बैठक के बाद अपना नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद चुनावी मुकाबले में कांग्रेस उम्मीदवार को विपक्षी समर्थन मिला, लेकिन मतगणना के नतीजों में BJP प्रत्याशी ने बड़े अंतर से बढ़त बनाए रखी।

उपचुनाव से पहले नंदीग्राम में राजनीतिक सरगर्मी उस समय और बढ़ गई, जब वर्ष 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े मामले में मिलन प्रधान की गिरफ्तारी हुई। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। हालांकि, कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें उपचुनाव लड़ने के लिए जमानत प्रदान की। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के अंतरिम जमानत संबंधी आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रधान अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने की मांग करते हैं, तो पश्चिम बंगाल सरकार हाई कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रख सकती है।

नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में 6 अक्टूबर को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान कराया गया था। निर्वाचन आयोग के अनुसार, दोनों क्षेत्रों में मतदान के दौरान कुछ छोटी-मोटी घटनाओं को छोड़कर स्थिति काफी हद तक शांतिपूर्ण रही। मतदान प्रतिशत 79.39 दर्ज किया गया। अब नंदीग्राम के नतीजों ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों और आगामी चुनावी रणनीतियों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

BJP की इस बड़ी जीत के बाद राजनीतिक विश्लेषकों और विभिन्न दलों की निगाहें पश्चिम बंगाल की आगे की राजनीति पर टिकी हैं। हालांकि, उपचुनाव के परिणाम को पूरे राज्य के जनादेश का निर्णायक संकेत मानने के बजाय इसे संबंधित क्षेत्र के मतदाताओं के रुझान के रूप में देखना अधिक उचित होगा।

Editor CP pandey

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