पेड़ लगाना ही नहीं, रखना भी है ध्यान।
जल देकर जीवन मिले, छेड़ो ये अभियान।।
पाँच जून के दिन सभी, लें ऐसा संकल्प।
सूखे पौधों को मिले, जीवन का फिर विकल्प।।
सेवा का संदेश हो, होता तब कल्याण—
जल देकर जीवन मिले, छेड़ो ये अभियान।।
रोपे थे जो वर्ष भर, खड़े वहीं लाचार।
पानी बिन मुरझा रहे, कैसे हों साकार।।
पहले उनको सींचिए, फिर करना गुणगान—
जल देकर जीवन मिले, छेड़ो ये अभियान।।
सेल्फी लेकर क्या मिला, यदि पौधों में टूट।
धरती माँ की गोद से, हरियाली ले लूट।।
कर्मों से पहचान हो, नहीं दिखावा-ज्ञान—
जल देकर जीवन मिले, छेड़ो ये अभियान।।
छाया, फल और प्राण का, देते जो उपहार।
उनके प्रति भी चाहिए, अपना कुछ उपकार।।
पेड़ों से ही जीवित है, धरती का सम्मान—
जल देकर जीवन मिले, छेड़ो ये अभियान।।
‘प्रियंका’ यही वृक्ष ही, जीवन का आधार।
इनसे ही खुशहाल है, प्रकृति का संसार।।
पाँच जून पर लीजिए, बस इतना अरमान—
जल देकर जीवन मिले, छेड़ो ये अभियान।।
डॉ. प्रियंका सौरभ
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