बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के बलिया में भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी एक महिला पदाधिकारी ने पार्टी के कुछ नेताओं और अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाकर सनसनी मचा दी है। महिला का दावा है कि कथित निजी वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर उसे लंबे समय तक डराया-धमकाया गया और उसका शोषण किया गया। विरोध करने पर कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
महिला ने खुद को भाजपा जिला कार्यसमिति की सदस्य बताते हुए आरोप लगाया कि संजय मिश्रा, आलोक सिंह उर्फ मोनू, गणेश गुप्ता और अजीत मिश्रा उर्फ चंदन समेत कुछ लोगों ने उसका कथित निजी वीडियो तैयार किया और बाद में उसे वायरल करने की धमकी दी। महिला का आरोप है कि इसी दबाव के जरिए उसके साथ शोषण किया गया। जब उसने विरोध किया और आगे ऐसा करने से इनकार कर दिया तो कथित वीडियो प्रसारित कर दिया गया।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, बांसडीह कोतवाली क्षेत्र में महिला की शिकायत पर निजी वीडियो को कथित तौर पर बिना अनुमति प्रसारित करने के मामले में आलोक सिंह, गणेश गुप्ता और अजीत मिश्रा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है।
महिला का आरोप है कि घटना के बाद वह प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए करीब 15 दिनों तक स्थानीय कोतवाली के चक्कर लगाती रही, लेकिन उसकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। उसका दावा है कि बाद में उसने उच्च अधिकारियों के समक्ष शिकायत की, जिसके बाद मुकदमा दर्ज किया गया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि प्राथमिकी में उसके द्वारा बताए गए सभी नाम शामिल नहीं किए गए और कुछ आरोपों के संबंध में अपेक्षाकृत हल्की धाराएं लगाई गईं।
महिला के अनुसार, उसने पुलिस के सामने अपना विस्तृत बयान और शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया है। उसने भाजपा जिला अध्यक्ष संजय मिश्रा पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं और दावा किया है कि पार्टी कार्यालय में महिलाओं के साथ कथित तौर पर मानसिक, आर्थिक और शारीरिक शोषण किया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
महिला ने यह भी दावा किया कि कथित रूप से प्रताड़ित महिलाओं की संख्या केवल एक तक सीमित नहीं है और कुछ अन्य महिलाएं भी इस तरह की परेशानी का सामना कर चुकी हैं। हालांकि, इस संबंध में अन्य महिलाओं की स्वतंत्र शिकायत या उनके सार्वजनिक बयान की पुष्टि फिलहाल उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि महिला द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप और पुलिस की ओर से दर्ज मुकदमा अलग-अलग स्तर के तथ्य हैं। उपलब्ध पुलिस रिपोर्टों के अनुसार निजी वीडियो के कथित प्रसारण के मामले में तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच की जा रही है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, वीडियो के स्रोत, उसके प्रसारण और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
अब पुलिस विवेचना में सामने आने वाले बयान, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, मोबाइल और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड तथा उपलब्ध अन्य साक्ष्यों से यह स्पष्ट होगा कि महिला द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और मामले में किन लोगों की क्या भूमिका रही। फिलहाल सभी आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए और जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं होगा।
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