July 24, 2024

राष्ट्र की परम्परा

हिन्दी दैनिक-मुद्द्दे जनहित के

संगीत के माध्यम से आत्म प्रकटीकरण करना सम्भव: डॉ. दुर्गेश उपाध्याय

विषाक्त संबंध की पहचान ही उसके रोकथाम का बेहतर जरिया: डॉ गरिमा सिंह

मनोविज्ञान विभाग में अंतर्वैयक्तिक संबन्ध विषयक कार्यशाला

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग अंतर्वैयक्तिक संबन्ध विषय पर ऑनलाइन आयोजित ‘वैल्यू एडेड कोर्स’ के आठवें दिन मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. दुर्गेश उपाध्याय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ यूनिवर्सिटी रहें।
अपने उद्बोधन में डॉ. दुर्गेश उपाध्याय ने बताया कि स्व प्रकटीकारण किसी अन्य व्यक्ति को अपने बारे में व्यक्तिगत जानकारी प्रकट करने का कार्य है। यह जानकारी वर्णनात्मक या मूल्यांकन हो सकती है, इसमें विचारों, भावनाओं, आकांक्षाएं, लक्ष्य असफलताएं, सफलताएं और सपने शामिल हो सकते हैं। साथ ही किसी की पसंद ना पसंद भी शामिल हो सकती है और साथ ही उन्होंने स्व प्रकटीकरण के स्तरों के बारे में उनके महत्व और उनके नकारात्मक परिणामों के बारे में बताया।
तकनीकी सत्र की दूसरी मुख्य वक्ता डॉ. गरिमा सिंह ने विषाक्त संबंधों के बारे में बात की। अपने संबोधन में, उन्होंने विषाक्त संबंधों की पहचान करने के संकेतों और इससे उबरने के तरीकों का भी उल्लेख किया। उन्होंने शारीरिक हिंसा, मनोवैज्ञानिक हिंसा, गैसलाइटिंग, दोषारोपण का खेल, प्रकृति को नियंत्रित करने, अधिकार, उपेक्षा के बारे में एक विषाक्त रिश्ते के कुछ संकेतों के रूप में उल्लेख किया।
डॉ. गरिमा ने बताया कि य़ह महत्वपूर्ण है कि हम ये पहचान करे कि किस रिश्ते में हमें रहना है, परंतु उससे अधिक उल्लेखनीय है कि हम किस रिश्ते से बाहर निकाले।
संचालक डॉ. रश्मि रानी ने मुख्य वक्ता का स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापित किया ।
इस अवसर पर मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर धनंजय कुमार, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, प्रो. अनुभूति दुबे, मनोविज्ञान विभाग के डॉ. गिरिजेश यादव, डॉ. विस्मिता पालीवाल, डॉ. प्रियंका गौतम व डॉ. राम कीर्ति सिंह उपस्थित रहे।