संत पचौरी जी महाराज ने श्रीकृष्ण लीला के दिव्य प्रसंगों से अष्टम दिवस को किया अविस्मरणीय

सुदामा चरित्र, नव योगेश्वर उपाख्यान और परीक्षित मोक्ष का भावपूर्ण वर्णन

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला मुख्यालय के औद्योगिक अस्थान में चल रहे नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का अष्टम दिवस श्रद्धा और भक्ति के उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कथा का आयोजन भारत-तिब्बत समन्वय संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं हीरालाल रामनिवास इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य रामकुमार सिंह के सौजन्य से किया गया है।
वृंदावन धाम से पधारे सुप्रसिद्ध कथा वाचक राष्ट्रीय संत पचौरी जी महाराज ने अष्टम दिवस की कथा में भगवान श्रीकृष्ण के 16 हजार 108 विवाह, सुदामा चरित्र, नव योगेश्वर उपाख्यान, चौबीस गुरुओं के उपदेश और राजा परीक्षित मोह की कथा का विस्तार से वर्णन किया।
महाराज ने कहा कि जब नरकासुर का वध हुआ, तब भगवान श्रीकृष्ण ने बंदीगृह में कैद 16 हजार 108 राजकुमारियों का उद्धार किया और उनके सम्मान की रक्षा के लिए उनसे विवाह किया। यह प्रसंग दर्शाता है कि भगवान सदैव अपने भक्तों और अबलाओं के मान-सम्मान की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं।
सुदामा चरित्र का उल्लेख करते हुए महाराज ने कहा कि सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता सच्चे प्रेम और निःस्वार्थ भक्ति का प्रतीक है। निर्धन सुदामा की भेंट को भगवान ने भाव से स्वीकार किया, जो यह दर्शाता है कि भगवान भाव में बसते हैं, भेंट में नहीं।
नव योगेश्वर उपाख्यान के माध्यम से महाराज ने बताया कि भगवान दत्तात्रेय के नौ योगेश्वर स्वरूपों ने राजर्षि निमि को आत्मा, परमात्मा और भक्ति का ज्ञान दिया। उन्होंने कहा कि मोक्ष केवल ज्ञान और भक्ति के समन्वय से संभव है।
चौबीस गुरुओं के प्रसंग में संत पचौरी जी महाराज ने कहा कि भगवान दत्तात्रेय ने सृष्टि के हर तत्व से कुछ न कुछ सीखकर उसे अपना गुरु माना। इससे यह शिक्षा मिलती है कि संसार का हर दृश्य और हर जीव किसी न किसी रूप में हमारा शिक्षक है।
कथा के अंतिम भाग में राजा परीक्षित मोह प्रसंग का उल्लेख करते हुए महाराज ने कहा कि मृत्यु के सातवें दिन परीक्षित ने श्रीशुकदेव जी से श्रीमद्भागवत कथा सुनकर मोह और माया से विमुक्त होकर परम मुक्ति प्राप्त की। श्रद्धालु कथा में तल्लीन होकर भक्ति रस में सराबोर हो गए।
कथा को विश्राम देते हुए संत पचौरी जी महाराज ने कहा कि

“श्रीमद्भागवत कथा केवल श्रवण का विषय नहीं, बल्कि आत्मज्ञान और जीवन उत्थान की कुंजी है।”


इस अवसर पर कथा परीक्षित उर्मिला सिंह, रामकुमार सिंह, डॉ. के.के. सिंह, रमाशंकर सिंह, डॉ. श्याम कुमार सिंह, डॉ. पवन कुमार सिंह, एमएलसी प्रतिनिधि इंजीनियर सुधांशु सिंह, शंभू त्रिपाठी, प्रदीप सिंह सिसोदिया, मुन्नी देवी, अयांश, रेयांश, भाजपा नेता गौरव निषाद सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

rkpNavneet Mishra

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