किताबों से निकलकर आंखों के सामने उड़ा रॉकेट, रोमांचित हुए बच्चे; बोले- बड़े होकर हम भी रचेंगे इतिहास
कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। अंतरिक्ष में उड़ते रॉकेट और उपग्रहों की तस्वीरें अब तक किताबों में देखी थीं, उनके बारे में कक्षा में पढ़ा था, लेकिन सोमवार को जब आंखों के सामने रॉकेट ने उड़ान भरी तो बच्चों का उत्साह देखते ही बना। किसी के चेहरे पर हैरानी थी तो किसी की आंखों में वैज्ञानिक बनने का सपना। रॉकेट की लॉन्चिंग देखकर बच्चों ने सिर्फ रोमांच महसूस नहीं किया, बल्कि भविष्य में खुद ऐसी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का संकल्प भी जताया। कुशीनगर में आयोजित इन-स्पेस की राष्ट्रीय रॉकेट्री और कैनसैट प्रतियोगिता स्कूली बच्चों के लिए विज्ञान को करीब से समझने का यादगार अवसर बन गई।
लॉन्चिंग देख खिले बच्चों के चेहरे, तकनीक को समझने की जगी जिज्ञासा
कार्यक्रम में कुशीनगर और देवरिया के चार स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने भ्रमण किया। इनमें जगदीश पब्लिक स्कूल, गौरी श्रीराम और स्टार पब्लिक स्कूल, परसा उर्फ सिरिसिया (कुशीनगर) के साथ गुरुकुल मिशन स्कूल और सनबीम स्कूल (देवरिया) के विद्यार्थी शामिल रहे। अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों ने आयोजन स्थल पर रॉकेट और कैनसैट के प्रक्षेपण को करीब से देखा। उनके लिए यह किसी रोमांचक विज्ञान फिल्म को हकीकत में देखने जैसा अनुभव था। लॉन्चिंग की गतिविधियों के दौरान बच्चों ने रॉकेट और कैनसैट के निर्माण, उनमें इस्तेमाल होने वाली तकनीक और प्रक्षेपण की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी हासिल की। विज्ञान की किताबों में पढ़े सिद्धांतों को वास्तविक रूप में देखने से विद्यार्थियों की जिज्ञासा बढ़ी। आयोजन ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि वैज्ञानिक प्रयोग केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मेहनत, तकनीकी ज्ञान और टीमवर्क के सहारे बड़े लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।
‘अब हम भी बनाएंगे रॉकेट, प्रतियोगिता में लेंगे हिस्सा’
जगदीश पब्लिक स्कूल के छात्र अनुज कुमार, आयुष राय, मनीष मिश्रा और ऋतिक कुमार ने इस अनुभव को खास बताया। विद्यार्थियों के मुताबिक, अब तक उन्होंने रॉकेट और उपग्रहों के बारे में किताबों और तस्वीरों के माध्यम से ही जाना था। यहां उन्हें इन गतिविधियों को सामने से देखने और तकनीक को समझने का मौका मिला। इस अनुभव ने उनके मन में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति नई रुचि पैदा की है। बच्चों ने इच्छा जताई कि बड़े होकर वे भी ऐसी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लें और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करें।
छोटे शहरों के बच्चों को भी मिले बड़े सपनों की उड़ान
देवरिया के सांसद शशांक मणि ने कहा कि अंतरिक्ष तकनीक और विज्ञान से जुड़ी गतिविधियों का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। छोटे शहरों और जिलों के विद्यार्थियों को भी ऐसे अवसर मिलने चाहिए, जहां वे तकनीक को अपनी आंखों से देख सकें और उससे सीख सकें। कुशीनगर में आयोजित यह प्रतियोगिता स्थानीय विद्यार्थियों के लिए विज्ञान की दुनिया से जुड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। ऐसे आयोजनों से बच्चों में सवाल पूछने, प्रयोग करने और नई चीजें सीखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलता है। रॉकेट की कुछ पलों की उड़ान ने इन बच्चों के मन में बड़े सपनों के बीज बो दिए हैं। अब देखना होगा कि आज दर्शक बनकर पहुंचे इन विद्यार्थियों में से कितने कल अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में अपनी पहचान बनाते हैं।
फोटो Ai मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। अपराधियों में अपने कर्तव्यनिष्ठ कार्यशैली से दहशत पैदा करने…
कुशीनगर बना युवा वैज्ञानिकों का लॉन्चपैड, IIT समेत देश के बड़े संस्थानों की टीमें दिखा…
सभासद ने ईओ को सौंपा शिकायती पत्र, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और अभिलेखों की जांच…
अधिकारियों को दिए त्वरित निस्तारण के निर्देश, बोले- अंतिम पात्र व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का…
खाद्य प्रसंस्करण विभाग की पहल पर एक माह तक चलेगा कुकरी और बेकरी प्रशिक्षण महराजगंज…
रैंक पिपिंग सेरेमनी में कुलपति सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने लगाए बैज लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)।…