कुशीनगर बना युवा वैज्ञानिकों का लॉन्चपैड, IIT समेत देश के बड़े संस्थानों की टीमें दिखा रहीं दम
दो दिनों में 39 कैनसैट और 8 मॉडल रॉकेट का सफल प्रक्षेपण, मंगलवार को होगा राष्ट्रीय प्रतियोगिता का समापन
कुशीनगर (✍️ राष्ट्र की परम्परा)। अंतरिक्ष की दुनिया में कुछ नया करने का जुनून, तकनीक से प्रयोग करने का उत्साह और आसमान को छूने का सपना… कुशीनगर में नारायणी नदी के तट पर आयोजित राष्ट्रीय स्तर की अंतरिक्ष प्रतियोगिता में युवा प्रतिभाओं का यही जोश देखने को मिल रहा है। इन-स्पेस कैनसैट और मॉडल रॉकेट्री इंडिया स्टूडेंट कंप्टीशन-2026 के दूसरे दिन सोमवार को 20 कैनसैट और 7 मॉडल रॉकेट का प्रक्षेपण किया गया। इसके साथ ही दो दिनों में लॉन्च किए गए कैनसैट की संख्या 39 और मॉडल रॉकेट की संख्या 8 पहुंच गई। दूसरे दिन 27 छात्र टीमों ने अपनी तकनीकी प्रतिभा और प्रयोगात्मक कौशल का प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता में छात्र केवल रॉकेट और कैनसैट लॉन्च करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपने प्रयोगों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर तकनीकी सफलता और संभावित कमियों को भी समझ रहे हैं। लॉन्च के बाद जुटाए गए डेटा के आधार पर टीमें अपने सिस्टम के प्रदर्शन, डिजाइन और तकनीकी कार्यक्षमता का आकलन कर रही हैं। यह प्रक्रिया विद्यार्थियों को वास्तविक अंतरिक्ष अभियानों में इस्तेमाल होने वाली वैज्ञानिक कार्यप्रणाली का अनुभव दे रही है।
युवा वैज्ञानिकों के हुनर पर टिकी निगाहें
प्रतियोगिता को लेकर विद्यार्थियों में खासा उत्साह है। अंतिम दिन मंगलवार, 3 नवंबर को विभिन्न टीमों के प्रदर्शन, तकनीकी उपलब्धियों और प्रयोगों के परिणामों पर विशेष नजर रहेगी। प्रतिभागियों को अपने अभिनव विचारों और इंजीनियरिंग कौशल को सामने रखने का अवसर मिलेगा। इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर अंतरिक्ष तकनीक की वास्तविक चुनौतियों से रूबरू कराना है।
इन-स्पेस के निदेशक (प्रमोशन निदेशालय) डॉ. विनोद कुमार ने विद्यार्थियों के उत्साह और तकनीकी प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि युवा प्रतिभाओं का प्रदर्शन अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के अंतिम दिन टीमों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को प्रयोग आधारित शिक्षा, नवाचार और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करते हैं तथा भविष्य के अंतरिक्ष पेशेवरों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
देश के नामी संस्थानों की टीमें मैदान में
इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के कई प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं। कैनसैट श्रेणी में आईआईटी मुंबई, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी (आईआईएसटी), नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (एनएसयूटी), लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी और जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की टीमें शामिल हैं।
वहीं, मॉडल रॉकेट्री श्रेणी में अनुराग यूनिवर्सिटी, मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मैनिट), आईआईटी पलक्कड़, दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और दयानंद सागर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्रतिभागी अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं।
मंगलवार, 3 नवंबर को प्रतियोगिता का समापन होगा। दो दिनों में हुए दर्जनों प्रक्षेपणों के बाद अब सभी की निगाहें अंतिम दिन के प्रदर्शन और विद्यार्थियों की तकनीकी उपलब्धियों पर टिकी हैं। कुशीनगर में आयोजित यह प्रतियोगिता युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान, इंजीनियरिंग और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है।
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