संकल्प दिवस: राष्ट्रीय अस्मिता और अखंडता का प्रश्न

महर्षि कश्यप की तपोभूमि का एक-एक इंच हमारा है!

22 फरवरी 1994 का दिन भारतीय संसदीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है। इसी दिन संसद ने सर्वसम्मति से यह ऐतिहासिक संकल्प पारित किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और उसके जिस हिस्से पर पाकिस्तान तथा चीन का अवैध कब्जा है, उसे वापस लेने का राष्ट्रीय संकल्प अटल है। यह दिन केवल एक राजनीतिक घोषणा भर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता, संप्रभुता और अखंडता के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का कुल क्षेत्रफल लगभग 2,22,236 वर्ग किलोमीटर है। इसमें से एक बड़ा भाग आज भी पाकिस्तान और चीन के कब्जे में है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान का क्षेत्रफल लगभग 64,817 वर्ग किमी, पाकिस्तान अधिकृत जम्मू क्षेत्र का लगभग 13,297 वर्ग किमी तथा चीन के कब्जे वाले अक्साई चिन क्षेत्र का लगभग 42,735 वर्ग किमी माना जाता है। ये आंकड़े केवल भौगोलिक विस्तार नहीं दर्शाते, बल्कि उन ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामरिक आयामों की भी याद दिलाते हैं, जिनसे यह क्षेत्र जुड़ा है।
जम्मू-कश्मीर को प्राचीन ग्रंथों में महर्षि कश्यप की तपोभूमि बताया गया है। यहां की सांस्कृतिक विरासत, विविधता और आध्यात्मिक परंपरा भारतीय सभ्यता की समृद्धि को प्रतिबिंबित करती है। इसलिए इस भूभाग का प्रश्न केवल सीमाओं का विवाद नहीं, बल्कि ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक धरोहर का भी विषय है।
1994 का संसदीय संकल्प इस बात का स्पष्ट संदेश था कि भारत अपनी क्षेत्रीय अखंडता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। समय के साथ परिस्थितियां बदलीं, संवैधानिक व्यवस्थाओं में परिवर्तन हुए, और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर दृष्टिकोण और अधिक सुदृढ़ हुआ। किंतु मूल भावना वही है। देश की एक-एक इंच भूमि की रक्षा।
आज जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है, तब इस संकल्प दिवस का महत्व और बढ़ जाता है। यह हमें स्मरण कराता है कि राष्ट्रीय मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट रहना ही लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति है। संसद की सर्वसम्मति ने यह सिद्ध किया था कि जब बात राष्ट्र की हो, तो पूरा देश एक स्वर में बोलता है।
संकल्प दिवस केवल अतीत की घटना नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए प्रेरणा है। यह हमें राष्ट्रीय हितों के प्रति सजग, जागरूक और प्रतिबद्ध रहने का संदेश देता है। राष्ट्र की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी कर्तव्य है।
इस दिन का सार यही है- संकल्प अटल रहे, एकता मजबूत रहे और राष्ट्र सर्वोपरि रहे।

rkpshomnath

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