गोरखपुर/बांसगांव (राष्ट्र की परम्परा)। रेलवे में फर्जी भर्ती के बड़े रैकेट की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने बृहस्पतिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए मास्टरमाइंड राघवेंद्र शुक्ला उर्फ अनिल पांडेय के बांसगांव क्षेत्र के फुलहर गांव स्थित मकान पर छापा मारा। हालांकि, अनिल पांडेय मौके पर नहीं मिला। पटना से आई ईडी की टीम ने करीब आठ घंटे तक उसके बड़े भाई धीरज पांडेय से पूछताछ की और घर के सभी कमरों की गहन तलाशी ली।
तलाशी के दौरान टीम को कोई बड़ी नकदी या आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली, लेकिन ईडी अधिकारी धीरज पांडेय और उनकी पत्नी के बैंक खातों की फोटो कॉपी, मोबाइल फोन, पैन कार्ड, आधार कार्ड और बैंक लोन से जुड़े दस्तावेज साथ ले गए। अधिकारियों ने संपत्तियों और मकान निर्माण को लेकर भी विस्तृत जानकारी जुटाई।
सोनपुर से खुला था फर्जी भर्ती रैकेट
गौरतलब है कि 30 दिसंबर 2023 को बिहार के सोनपुर रेलवे स्टेशन पर सीनियर डीसीएम रौशन कुमार ने चार फर्जी टीटीई को टिकट जांच करते हुए फर्जी आईकार्ड के साथ पकड़ा था। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जब खुफिया जांच शुरू हुई, तो यह सामने आया कि रेलवे में फर्जी भर्ती का यह रैकेट देशभर में फैला हुआ है। इसी जांच में अनिल पांडेय का नाम सामने आया, जिसके बाद से उसकी तलाश में लगातार टीमें लगी हुई हैं।
तीन चरणों में पूछताछ, पत्नी का भी बयान दर्ज
ईडी के करीब 10 अधिकारी दो गाड़ियों से सुबह करीब सात बजे फुलहर गांव पहुंचे थे। टीम ने पहले घर के सभी सदस्यों के मोबाइल फोन कब्जे में लिए और फिर तीन चरणों में धीरज पांडेय से पूछताछ की। इसके बाद उनकी पत्नी का भी बयान दर्ज किया गया।
धीरज पांडेय के अनुसार, ईडी टीम ने उनसे कहा कि उनके भाई ने रेलवे भर्ती में बड़ा घोटाला किया है और मकान निर्माण को लेकर सवाल किए। इस पर उन्होंने बताया कि घर बैंक लोन लेकर बनवाया गया है और उन्हें अपने भाई के ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
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एक साल से घर नहीं आया अनिल पांडेय
धीरज पांडेय ने बताया कि अनिल करीब एक साल से घर नहीं आया है और न ही किसी तरह का संपर्क है। अनिल ने पहले बताया था कि वह गोरखपुर और लखनऊ में जमीन की खरीद-फरोख्त का काम करता है। इससे अधिक जानकारी उन्हें नहीं है। ईडी अधिकारियों ने कहा कि जब भी बुलाया जाएगा, सभी दस्तावेज लेकर उपस्थित होना होगा।
राघवेंद्र शुक्ला नाम सुनकर चौंका परिवार
जांच के दौरान जब ईडी टीम ने अनिल पांडेय का दूसरा नाम राघवेंद्र शुक्ला बताया, तो बड़े भाई धीरज पांडेय चौंक गए। उन्होंने कहा कि वे पांडेय हैं, शुक्ला नहीं। इसके बाद टीम ने दस्तावेज दिखाते हुए बताया कि अनिल पांडेय ही राघवेंद्र शुक्ला नाम का इस्तेमाल करता था। धीरज ने बताया कि यह नाम उन्होंने भी पहली बार सुना है।
टीम ने खुद मंगवाया भोजन
छापे के दौरान ईडी टीम ने दोपहर का भोजन खुद बाहर से मंगवाया और घर पर ही बैठकर खाना खाया। गांव के लोगों ने गाड़ियों को आते-जाते देखा, लेकिन उन्हें लगा कि कोई रिश्तेदार आया होगा।
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