रबी सीजन 2025: गेहूं, चना, सरसों और दालों की बुआई का सर्वोत्तम महीना कौन-सा?

रबी फसल की बुआई का सही समय: कब, कैसे और किन फसलों की हो समयानुसार बोआई — किसान के लिए साल की सबसे निर्णायक तैयारी भारत की कृषि व्यवस्था मौसम चक्र पर आधारित है, और इन्हीं मौसमों के बीच रबी फसलें किसान के लिए उम्मीदों का नया मौसम लेकर आती हैं। ठंडी हवाओं के बीच खेतों की कोमल मिट्टी जब ओस की नमी से भर जाती है, तब रबी की बुआई किसान के लिए सिर्फ खेती नहीं, बल्कि मेहनत, उम्मीद और भविष्य की नींव बन जाती है। “रबी फसल की बुआई का सही समय” को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि समय पर की गई बुआई न सिर्फ पैदावार बढ़ाती है, बल्कि लागत कम करके लाभ को कई गुना बढ़ा देती है।

ये भी पढ़ें – भ्रष्टाचार के साए में दम तोड़ती व्यवस्था: कब जागेगा सिस्टम और कब बदलेगा भविष्य?

इस विस्तृत लेख में जानिए—रबी फसलें कौन-कौन सी हैं, उनकी बुआई का सर्वोत्तम समय, सही तरीके, मिट्टी की तैयारी, सिंचाई और मौसम की सावधानियाँ।
🌾 रबी फसलें कौन-कौन सी होती हैं?
भारत में मुख्य रबी फसलें इस प्रकार हैं—
गेहूं,चना,मसूर,सरसो,जौ,लहसुन,प्याज,मेथी,अलसी,मटर
इन फसलों की बोआई अक्टूबर से जनवरी के बीच होती है, लेकिन हर फसल का अपना अलग अनुकूल समय होता है जिसे किसान को ध्यान में रखना चाहिए।
🌱 रबी फसल की बुआई का सही समय: किस फसल की कब बोआई करें?गेहूं (Wheat) सर्वोत्तम बुआई समय: 15 नवंबर से 25 दिसंबर,देरी का प्रभाव: जनवरी के बाद बोआई करने पर उत्पादन 20–30% घट सकता है।क्यों सही समय जरूरी: अत्यधिक ठंड में अंकुरण धीमा होता है और गर्मी जल्दी पड़ जाए तो दाना ठीक से नहीं बनता।

चना (Gram) बुआई समय: 15 अक्टूबर से 20 नवंबर,देरी का असर: फली कम लगती है, दाना छोटा रह जाता है।विशेष सुझाव: हल्की दोमट या मध्यम काली मिट्टी में यह समय सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

सरसों (Mustard),बुआई समय: 25 अक्टूबर से 15 नवंबर,सही समय का लाभ: तेल की मात्रा अधिक, फली झड़ने की समस्या कम।
देरी पर असर: पौधा लंबा हो जाता है और उत्पादन घटता है।

ये भी पढ़ें –18 नवंबर की महत्वपूर्ण घटनाएँ: वो पल जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी

मसूर (Lentil) बुआई समय: 1 नवंबर से 30 नवंबर,क्यों: समय पर बोआई से फली बनना और फूल आना संतुलित रहता है।

जौ (Barley)बुआई समय: नवंबर का पहला सप्ताह से दिसंबर मध्य तक,विशेष: बीयर उद्योग एवं पशु चारे के लिए उपयुक्त गुणवत्ता इसी समय की बोआई से मिलती है।

लहसुन (Garlic)बुआई समय: 15 अक्टूबर से 30 नवंबर,क्यों: ठंड के मौसम में कलियाँ मजबूत व बड़ी बनती हैं।

प्याज (Onion – Rabi Crop)बुआई समय: अक्टूबर के मध्य से नवंबर के अंत तक विशेष: अत्यधिक ठंड से पौधे जल सकते हैं, इसलिए समय महत्वपूर्ण।

मेथी, अलसी और मटर,बुआई का समय:
मेथी: 20 अक्टूबर से 20 नवंबर
अलसी: 1 नवंबर से 30 नवंबर
मटर: 20 अक्टूबर से 15 नवंबर
सभी दालों और तिलहनों की समय से बोआई फलियों और दानों की संख्या बढ़ाती है।
🌾 कैसे करें रबी फसल की बुआई? (प्रमाणिक और वैज्ञानिक विधि)
1️⃣ मिट्टी की सही तैयारी
खेत को दो से तीन जुताई करके भुरभुरा करें।
अंतिम जुताई में सड़ी गोबर खाद डालें।
कड़क मिट्टी या कठोर पपड़ी को पूरी तरह तोड़ना जरूरी है।
2️⃣ उन्नत बीज का चयन
प्रमाणित बीजों का उपयोग करें।
बीज को फफूंदनाशी से उपचारित कर ही बोएँ।
3️⃣ नमी की उपलब्धता
रबी फसलें नमी-संवेदनशील होती हैं।
पहली सिंचाई समय पर हो जाए तो उत्पादन 25–40% बढ़ जाता है।
4️⃣ बुआई की गहराई और दूरी
गेहूं: 4–5 सेमी गहराई
चना: 5–8 सेमी
सरसों: 3–4 सेमी
अत्यधिक गहराई से अंकुरण कमजोर होता है।
5️⃣ खाद एवं पोषण प्रबंधन
नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश का उचित संतुलन रखें।
जिंक व सल्फर की कमी वाली जमीन में सूक्ष्म पोषक तत्व जरूर दें।
6️⃣ मौसम पर नजर
अचानक पाला, कोहरा या ओलावृष्टि रबी फसलें गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं।
समय पर सिंचाई और पाला बचाव तकनीक अपनाएं।
🌾 समय पर बुआई क्यों जरूरी है?
रबी फसलें मौसम से सीधे जुड़ी होती हैं। समय से बोआई होने पर—
✔ दाना मोटा बनता है
✔ तेल वाली फसलों में तेल अधिक निकलता है
✔ रोग व कीट प्रकोप कम होता है
✔ उत्पादन 20–40% तक बढ़ जाता है
यह सिर्फ एक कृषि प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसान की साल भर की मेहनत और परिवार की खुशहाली की बुनियाद होती है। यही वजह है कि “रबी फसल की बुआई का सही समय” हर किसान के लिए जीवनरेखा की तरह है।

Editor CP pandey

Recent Posts

होली अवकाश में बदलाव, 28 फरवरी को भी खुलेंगे बैंक व सरकारी कार्यालय

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)l प्रदेश में होली पर्व को लेकर घोषित सार्वजनिक अवकाश में…

2 hours ago

डीडीयू विश्वविद्यालय ने घोषित किया विभिन्न पाठ्यक्रमों का सेमेस्टर परिणाम

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा बी.फार्मा तृतीय सेमेस्टर, बी.ए. तृतीय सेमेस्टर,…

2 hours ago

भारतीय ज्ञान परंपरा में लोक और शास्त्र का अद्भुत समन्वय: प्रो. अनामिका राय

ज्ञान से भारतीयता परिभाषित होती है, भारतीयता से ज्ञान नहीं: प्रो. अनामिका राय गोरखपुर (राष्ट्र…

3 hours ago

होम स्टे नीति-2025 से पर्यटन और रोजगार को मिलेगा नया विस्तार

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। पर्यटन विभाग द्वारा प्रख्यापित “उ0प्र0 बेड एण्ड ब्रेकफास्ट एवं…

4 hours ago

विज्ञान दिवस की पूर्व संध्या पर प्रतियोगिताओं की धूम

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस…

4 hours ago

28 फरवरी 2026 का पंचांग: त्रिपुष्कर योग में करें ये खास कार्य, मिलेगा तीन गुना फल

आज का पंचांग 28 फरवरी 2026: द्वादशी तिथि, त्रिपुष्कर योग, राहुकाल समय और शुभ मुहूर्त…

4 hours ago