देवरिया में पीडब्ल्यूडी घोटाला: राजनीतिक कार्यक्रम की आड़ में 2.5 करोड़ की फर्जी बिलिंग, दस्तावेजों पर नकली हस्ताक्षर से खुली पोल

देवरिया, राष्ट्र की परम्परा डेस्क लोक निर्माण विभाग (PWD) निर्माण खण्ड देवरिया में करोड़ों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। यह घोटाला अक्टूबर 2021 में पथरदेवा के आचार्य नरेंद्र देव इंटर कॉलेज में आयोजित उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के कार्यक्रम से जुड़ा है। आश्चर्यजनक रूप से, इस कार्यक्रम के नाम पर वर्ष 2025 में ₹2.5 करोड़ से अधिक की फर्जी बिलिंग प्रस्तुत कर सरकारी धन की वसूली का प्रयास किया गया।

महत्वपूर्ण जांच बिंदु: डाक नंबर और प्रेषण प्रक्रिया

घोटाले की तह तक जाने के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि जब दस्तावेजों पर अधिकारियों के हस्ताक्षर फर्जी हैं, तो यह देखना आवश्यक है कि संबंधित अवर अभियंता, पटल बाबू तथा डाक प्रेषण के समय कौन था। डाक भेजने से पूर्व उसके डाक नंबर की प्रविष्टि एवं स्वीकृति की प्रक्रिया की जांच करने पर फर्जीवाड़े की पूरी श्रृंखला उजागर हो सकती है।

फर्जी दस्तावेज और दोबारा भुगतान की कोशिश

17 अक्टूबर 2021 को आयोजित कार्यक्रम के लिए पंडाल, मंच, बैरिकेटिंग और अन्य व्यवस्थाओं के नाम पर पहले ही करोड़ों का भुगतान किया जा चुका था। इसके बावजूद, एक निजी फर्म ने वर्ष 2025 में पुनः ₹2,50,20,971 का बिल पीडब्ल्यूडी देवरिया को सौंपा। इस बिल में 34 अलग-अलग आपूर्ति आदेशों का उल्लेख किया गया, जिनके दस्तावेजों की सत्यता संदिग्ध पाई गई।

अधिशासी अभियंता की सतर्कता से हुआ खुलासा

जब यह बिल अधिशासी अभियंता के संज्ञान में आया, तो उन्होंने दस्तावेजों की सत्यता पर शक जताया। वर्तमान में सिद्धार्थनगर में तैनात उक्त अधिकारी ने प्रांतीय खंड सिद्धार्थनगर से दस्तावेजों की जांच करवाई। 21 जून 2025 को प्राप्त उत्तर में स्पष्ट रूप से कहा गया कि न तो किसी आदेश की स्वीकृति दी गई है, न ही दस्तावेजों पर अधिकारी या कर्मियों के हस्ताक्षर असली हैं।

दस्तावेजों पर कूटरचित हस्ताक्षर

जांच में यह स्पष्ट हुआ कि अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, लेखाधिकारी एवं लिपिक आदि के हस्ताक्षर फर्जी हैं। यह घोटाला योजनाबद्ध तरीके से किया गया, जिसमें अधिकारियों के नाम का दुरुपयोग कर दस्तावेज तैयार किए गए।

उच्च स्तरीय जांच की मांग

अधिशासी अभियंता ने प्रमुख अभियंता (विकास), मुख्य अभियंता (गोरखपुर क्षेत्र) और अधीक्षण अभियंता (देवरिया वृत्त) को पत्र भेजकर उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की मांग की है। उन्होंने दोषियों पर कठोर वैधानिक कार्रवाई की अपील की है ताकि इस तरह की आर्थिक अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सके।

सार्वजनिक धन का गंभीर दुरुपयोग

यह घोटाला सिर्फ एक वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि राजनीतिक आयोजनों की आड़ में सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का उदाहरण है। यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला उदाहरण बन जाएगा।

Editor CP pandey

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