नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के महत्वाकांक्षी PSLV-C62 EOS-N1 मिशन के दौरान सोमवार को एक अप्रत्याशित तकनीकी समस्या सामने आई, जिसने मिशन को निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने से रोक दिया। इसरो की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, रॉकेट के तीसरे चरण में गड़बड़ी आने के कारण उसकी उड़ान पथ (Trajectory) में विचलन देखा गया।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए इसरो चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि PSLV चार चरणों वाला विश्वसनीय प्रक्षेपण यान है। इसमें पहला और तीसरा चरण ठोस ईंधन, जबकि दूसरा और चौथा चरण तरल ईंधन से संचालित होते हैं। लॉन्च के बाद तीसरे चरण तक रॉकेट का प्रदर्शन पूरी तरह सामान्य रहा, लेकिन तीसरे चरण के अंतिम हिस्से में तकनीकी अड़चन उत्पन्न हो गई, जिससे रॉकेट अपने तय मार्ग से भटक गया और मिशन आगे नहीं बढ़ सका।
इसरो के अनुसार, EOS-N1 उपग्रह को निर्धारित कक्षा में स्थापित करने का प्रयास किया गया था, लेकिन दिशा परिवर्तन के कारण लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पाया। हालांकि, इसरो ने इसे आंशिक विफलता मानते हुए स्पष्ट किया है कि यह सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
फिलहाल देशभर में स्थित सभी ग्राउंड स्टेशनों से प्राप्त टेलीमेट्री और उड़ान डेटा का गहन विश्लेषण किया जा रहा है। विशेषज्ञों की एक टीम यह पता लगाने में जुटी है कि तीसरे चरण में यह तकनीकी समस्या किन कारणों से उत्पन्न हुई। जांच पूरी होने के बाद इसरो विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा।
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गौरतलब है कि PSLV इसरो का सबसे भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल माना जाता है और इससे पहले कई सफल मिशन पूरे किए जा चुके हैं। PSLV-C62 मिशन में आई यह बाधा भविष्य के अभियानों को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
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