बेसिक शिक्षकों की समस्याओं पर प्राथमिक शिक्षक संघ का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षकों की वर्षों से लंबित समस्याओं को लेकर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने अब आर-पार की लड़ाई का संकेत दिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो शिक्षक सड़क पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेंगे।

संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश धर दुबे ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षकों की सबसे गंभीर समस्या बिना स्पष्ट नीति के किया जा रहा समायोजन है। वर्षों से चली आ रही ऑनलाइन समायोजन प्रक्रिया को अचानक बंद कर ऑफलाइन व्यवस्था लागू कर दी गई, जिससे महिला शिक्षकों सहित सैकड़ों शिक्षकों को असुविधाजनक और दूरस्थ विद्यालयों में तैनात कर दिया गया।

गलत समायोजन से बिगड़ी शिक्षा व्यवस्था

गलत समायोजन के कारण जिले के कई प्राथमिक विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। संघ ने इस समायोजन प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग को लेकर शासन, बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिलाधिकारी को पत्र भेजा है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

15 साल से पदोन्नति नहीं, 95% स्कूल प्रभारी के भरोसे

राकेश धर दुबे ने बताया कि पिछले 15 वर्षों से प्रधानाध्यापकों की पदोन्नति नहीं हुई, जिसके चलते जिले के करीब 95 प्रतिशत विद्यालय प्रभारी प्रधानाध्यापकों के सहारे चल रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पात्र शिक्षकों को प्रधानाध्यापक का वेतन नहीं दिया जा रहा, जो न्याय का खुला उल्लंघन है।

मुख्यमंत्री के आदेश की अनदेखी

संघ के मीडिया प्रभारी ज्ञानेंद्र ओझा ने कहा कि सितंबर 2024 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया था कि शिक्षकों के प्रार्थना पत्रों पर तत्काल कार्रवाई हो और उनके साथ ट्रेड यूनियन जैसा व्यवहार न किया जाए। लेकिन जमीनी स्तर पर इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा।
उन्होंने बताया कि जिले में लगभग 2200 विद्यालय हेडमास्टर विहीन हैं। न ईयर मिल रहा है, न हाफ सैलरी और न ही मुख्यमंत्री द्वारा घोषित चिकित्सा सुविधा का शासनादेश जारी हुआ है।

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ऑनलाइन काम का बढ़ता बोझ, शिक्षकों की छवि पर असर

संघ के जिलाध्यक्ष एवं प्रदेश मंत्री श्रीधर मिश्रा ने कहा कि बेसिक शिक्षा से जुड़े लगभग सभी कार्य ऑनलाइन कर दिए गए हैं। शिक्षकों को 26 प्रकार के रजिस्टर ऑनलाइन भरने पड़ते हैं। विद्यालय में टैबलेट या मोबाइल पर काम करने से अभिभावकों को गलत संदेश जाता है कि शिक्षक पढ़ाने के बजाय मोबाइल चला रहे हैं, जिससे उनकी छवि धूमिल हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट का डर, नौकरी पर संकट

उन्होंने बताया कि टीईटी पास न कर पाने वाले पुराने शिक्षकों की नौकरी पर सुप्रीम कोर्ट की तलवार लटकी हुई है। प्रशासनिक दबाव, न्यायालयीय आदेश और अतिरिक्त कार्यभार के कारण शिक्षक मानसिक रूप से परेशान हैं।
संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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Karan Pandey

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