पेइचिंग/नई दिल्ली। (राष्ट्र की परम्परा डेस्क )भारत और चीन के बीच बीते कुछ वर्षों में तनावपूर्ण रिश्तों के बीच अब कूटनीतिक स्तर पर बर्फ पिघलती दिख रही है। बीते 20 दिनों में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अब विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की चीन यात्रा यह संकेत दे रही है कि दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक हलचल शुरू हो चुकी है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर 13 जुलाई से तीन दिवसीय चीन दौरे पर रवाना होंगे। इस दौरान वे पेइचिंग और तिआनजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। इस वर्ष चीन SCO की अध्यक्षता कर रहा है और इसी क्रम में विभिन्न स्तरों की अहम बैठकों की मेजबानी कर रहा है।
गलवान के बाद पहली चीन यात्रा
डॉ. जयशंकर का यह दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि यह जून 2020 की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद उनकी पहली आधिकारिक चीन यात्रा है। हालांकि, इस दौरान उन्होंने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से कई बहुपक्षीय मंचों पर मुलाकात की, लेकिन पेइचिंग की यह यात्रा भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
SCO की बैठक या संबंध सुधार का मंच?
सूत्रों के अनुसार, भले ही यह दौरा औपचारिक रूप से एससीओ सम्मेलन में भाग लेने के लिए हो रहा है, लेकिन इसे भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय बातचीत के एक संभावित मंच के रूप में देखा जा रहा है। बीते दिनों अमेरिका की नीतियों और डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी समीकरणों ने वैश्विक स्तर पर जो असहजता पैदा की है, वह भारत-चीन के संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने की संभावना बनाती है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली रणनीति?
हाल ही में भारत द्वारा पड़ोसी देशों के साथ बढ़ते रक्षा सहयोग और ऑपरेशन सिंदूर जैसे साहसिक कदमों के बाद, क्षेत्रीय समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। चीन भी इस स्थिति को भांपते हुए भारत के साथ कूटनीतिक संवाद को प्राथमिकता दे रहा है।
पहले डोभाल, फिर राजनाथ – अब जयशंकर
3 जून को एनएसए अजित डोभाल ने बीजिंग में अहम बैठक की।इसके दो सप्ताह बाद 25 जून को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बीजिंग पहुंचे।अब 13 जुलाई को विदेश मंत्री एस. जयशंकर चीन दौरे पर जा रहे हैं।यह सिलसिला स्पष्ट करता है कि भारत सरकार चीन के साथ संवाद और संतुलन बनाने की नीति पर कार्य कर रही है।
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